असम राइफल्स के विरोध में नहीं छापे संपादकीय
नागालैंड से प्रकाशित होने वाले छह अंग्रेजी अखबारों के संपादकों ने राज्य में आंतरिक सुरक्षा के लिए तैनात असम राइफल्स की दखलंदाजी का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है।
तीन अंग्रेजी अखबारों ने सोमवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर अपने संपादकीय कॉलम को खाली छोड़कर विरोध जताया है।
नगालैंड में सक्रिय अलगाववादी संगठनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही असम राइफल्स ने 24 अक्तूबर को एक पत्र लिखकर कहा कि अखबारों में हाल में प्रकाशित खबरों में एनएससीएन (खापलांग) की तरफ से राज्य सरकार के विधायकों को धमकी देने और उनसे धन वसूली की मांग करने संबंधी खबर प्रकाशित की गई।
पत्र के मुताबिक इस तरह के लेख एक तरह से अवैध संगठन का समर्थन करने जैसा है और अखबारों को ऐसे लेख प्रकाशित नहीं करने चाहिए।
ईस्टर्न मिरर, नागालैंड पेज और द मोरंग एक्सप्रेस जैसे तीन स्थानीय अंग्रेजी अखबारों ने इसके विरोध में अपना संपादकीय खाली छोड़ा।
असम राइफल्स की दखलंदाजी का विरोध
राज्य में दैनिक समाचार पत्रों की स्थापना के बाद से यह पहला ऐसा मौका है जब अखबारों के कामकाज पर किसी सुरक्षा एजेंसी ने इस तरह के सवाल उठाए हैं।
हालांकि असम राइफल्स के कर्नल राजेश गुप्ता ने फोन पर बीबीसी से कहा कि स्थानीय अखबारों को जो पत्र भेजा गया उसमें मीडिया पर दबाव बनाने जैसी कोई बात नहीं है।
नागालैंड के एक पत्रकार ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि नागालैंड में सभी संगठनों द्वारा धन उगाही का मुद्दा काफी गंभीर है।
इस मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी कर चुके संपादक अलग से कोई बात नहीं करना चाहते।
अपने साझा बयान में संपादकों ने कहा है कि वे नागालैंड के इतिहास की पृष्ठभूमि और वर्तमान वास्तविकता को ध्यान में रखकर एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, संवेदनशील और निष्पक्ष दृष्टिकोण से यहां रिपोर्टिंग कर रहे हैं।