मोदी के लिए भूटान ने तोड़ी ये परंपरा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय भूटान यात्रा बेहद सफल रही। दोनों मुल्कों के बीच सुरक्षा, शिक्षा, कारोबार, निवेश और पर्यटन जैसे मुद्दों पर सहयोग के लिए सहमति बनी।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की ये पहली विदेश यात्रा थी। उन्होंने भूटान की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित किया।
यात्रा समाप्त होने पर मोदी ने ट्वीट कर कहा कि यह दौरा मेरी यादों में बसा रहेगा। भूटान की यह यात्रा बेहद सफल और फलदायी रही।
यात्रा से गदगद भूटान ने नरेंद्र मोदी की तारीफ के लिए अपनी परंपरा भी तोड़ दी।
संसद में बजीं जोरदार तालियां
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को भूटान की संसद संयुक्त के संयुक्त सत्र को हिंदी में संबोधित किया। मोदी के भाषण से प्रभावित भूटानी सांसदों ने उनकी तारीफ के लिए अपने देश की परंपरा भी तोड़ दी।
सोमवार को जब मोदी ने संसद की संयुक्त बैठक में हिंदी में दिया गया अपना धाराप्रवाह भाषण समाप्त किया तो भूटानी सांसदों ने तारीफ में जोरदार तालियां बजाईं।
भूटान में किसी की प्रशंसा या स्वागत में तालियां नहीं बजाई जातीं। वहां बुरी आत्माओं को भगाने लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
मोदी की तारीफ में बजीं तालियां
भूटानी संसद में जैसे ही मोदी ने अपना भाषण खत्म किया प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और नेशनल असेंबली और नेशनल काउंसिल के सदस्यों ने तालियों से उनका स्वागत किया।
सासंदों ने मोदी के एक-एक शब्द को तवज्जो दी। भाषण का स्थानीय भाषा में अनुवाद किया जा रहा था। मोदी ने जैसे ही भाषण खत्म किया, संसद के एक कोने से तालियां बजनी शुरू हुई और धीरे-धीरे वीवीआईपी चैंबर्स से भी गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी।
विजिटर्स गैलरी में बैठे सदस्य भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने भी मोदी की तारीफ में तालियां बजाना शुरू कर दिया। विजिटर्स गैलरी भारतीय और भूटानी पत्रकारों के अलावा कई छात्र भी बैठे थे।
गलती पर मुस्कुराते नजर आए सांसद
हालांकि तालियां के गड़गड़ाहट के बाद कई सांसद अपनी गलती पर मुस्कुराते भी नजर आए। दरअसल, संसद के संयुक्त सत्र से एक दिन पहले मीडिया को ताली न बजाने के निर्देश दिए गए थे।
भूटानी प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी कर अपनी पुरानी परंपरा के बारे में जानकारी दी थी। कहा गया था कि संसद के संयुक्त सत्र में प्रधानमंत्री के भाषण के बाद ताली नहीं बजाई जाएगी। भूटान में बुरी आत्माओं को भगाने के लिए ताली बजाई जाती है, इसलिए ऐसा किया जाएगा।
ये निर्देश मीडिया सेंटर में चिपका दिए गए था। लेकिन भूटान के सांसदो ने ही ये परंपरा तोड़ दी। परंपरा तोड़ने पर सांसद शर्मिंदा भी दिखे और खुश भी।