क्या आपने देखी है फूल और पौधों से बनी घड़ी?
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बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर परिसर में बने उद्यान को और सुंदर बनाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फूल और पौधों से फ्लोरल क्लॉक बनाई जा रही है। यह क्लॉक देखने में जहां बेहद सुंदर होगी वहीं समय भी बताएगी।
फ्लोरल क्लॉक को बनाने पर करीब आठ लाख रुपये खर्च होंगे। अगस्त तक इसके तैयार होने के साथ ही बीएचयू देश का पहला ऐसा केंद्रीय विश्वविद्यालय बन जाएगा जहां फ्लोरल क्लॉक होगी।
बीएचयू के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि इस तरह की घड़ी बंगलुरू के लाल बाग और चंडीगढ़ के पिंजौर गार्डेन में है। देश में पहली बार किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस तरह की घड़ी बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इसकी डिजाइन तैयार करने केलिए बंगलुरू, हैदराबाद और सूरत से इंजीनियर प्रकाश भाई, दीपक मथूरिया और सुदीप को बुलाया गया था।
फ्लोरल क्लॉक बनाने में करीब 8 लाख होंगे खर्च
फ्लोरल क्लॉक को बनाने पर 8.30 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें मशीन की कीमत पांच लाख रुपये होगी जबकि तीन लाख तीस हजार रुपये इसको तैयार करने में खर्च आएगा। जर्मनी से घड़ी का मॉडल मंगाया गया है।
बताया कि उद्यान में 15 फीट की गोलाई में इसे बनाया जा रहा है। घड़ी की सुई और नंबर भी पौधों के ही होंगे। इसे बिजली या बैटरी से संचालित किया जाएगा जो इसके अंदर की ओर होगी। बाहर से देखने पर यह बैटरी दिखाई नहीं देगी। इस उद्यान में प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक गेट लगाया जाएगा।
इसे देखने के लिए दर्शकों को शुल्क देना होगा। शुल्क के बाद टोकन मिलेगा और उसे बायोमेट्रिक मशीन में डालने पर गेट खुलेगा। उद्यान विशेषज्ञ ने बताया कि पर्यटन को बढ़ावा देने, बीएचयू की पहचान को विश्वस्तर तक पहुंचाने और पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से फ्लोरल क्लॉक लगाई जा रही है।