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बिहार-यूपी में बाढ़ का कहर, लाखों लोग दरबदर

Mon, 18 Aug 2014 07:53 AM IST
एजेंसी, ब्यूरो/पटना, लखनऊ, गुवाहाटी
एजेंसी, ब्यूरो/पटना, लखनऊ, गुवाहाटी Updated Mon, 18 Aug 2014 07:53 AM IST
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बिहार के दरभंगा, नालंदा, पश्चिमी चंपारण, सुपौल, सहरसा, नवादा, शेखपुरा, सीतामढ़ी और पटना जिले में बाढ़ से कम से कम चार लाख लोग प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रविवार को सहरसा में बाढ़ की चपेट में आने के कारण दो लोगों की मौत हो गई। अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 38 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। प्रभावित जिलों में 75 राहत शिविर खोले गए हैं।

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मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और आपदा प्रबंधन विभाग के मुख्य सचिव व्यासजी के साथ इलाके का हवाई सर्वेक्षण कर प्रभावित लोगों को हर संभव राहत पहुंचाने का आदेश दिया है। मांझी ने कहा कि तेजी से राहत कार्य चलाया जाना चाहिए। इसके लिए धन की कमी नहीं होगी।
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व्यासजी ने कहा कि नालंदा के कई प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं। वहां पर राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें तैनात की गई हैं। उधर, कमला बलान और गंडक नदी पर बने बांध टूटने के कारण दरभंगा और चंपारण जिले बाढ़ की चपेट में हैं। व्यासजी ने कहा कि प्रभावित इलाकों को लोग खाली नहीं करना चाहते हैं जिस कारण उन्हें मौके पर भी खाने की चीजें उपलब्ध करवाई जा रही है।
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यूपी में 25 लाख की आबादी प्रभावित

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नेपाल से आए पानी के सैलाब ने अवध के आठ जिलों की करीब 25 लाख की आबादी को चपेट में ले लिया है। बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच में हालात ज्यादा खराब हैं।  इस बीच सरकार ने बाढ़ से बचाव के लिए सेना के दो हेलीकॉप्टर, एनडीआरएफ की टीम व पीएसी के जवान लगाए हैं। सेना को सतर्क कर दिया गया है। मरने वालों की संख्या 28 तक पहुंच गई है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बाढ़ से प्रभावित मृतक आश्रितों को 1.5-1.5 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिए हैं।

श्रावस्ती में राप्ती नदी दूसरे दिन रविवार को इकौना में अपना तांडव दिखाया। लगभग 95 गांव के लोग 24 घंटे तक छतों पर ही लोग फंसे रहे। इनमें से लगभग आधे गांवों में रविवार तक सरकार की ओर से कोई भी बचाव दल नहीं पहुंचा, और न ही राहत सामग्री। वहीं बहराइच जिले में अब तक 227 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। लगभग सवा तीन लाख की आबादी प्रभावित है। शासन से राहत व बचाव कार्य के लिए मांगा गया हेलीकॉप्टर अब तक नहीं मिल पाया है। एनडीआरएफ व पीएसी की टीमें लगी तो हैं लेकिन ग्रामीण अंचलों में काफी अंदर बाढ़ में फंसे लोगों तक अभी भी एनडीआरएफ और पीएसी के जवान नहीं पहुंच सके हैं।

बाढ़ की विभीषिका के आगे प्रशासन लाचार

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बलरामपुर में प्रदेश के जंतु उद्यान मंत्री एसपी यादव के घर में पानी घुस गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104-620 मीटर से 79 सेमी ऊपर पहुंच गया है। तुलसीपुर, बहराइच तथा उतरौला मार्ग पर बाढ़ का पानी आने के कारण आवागमन ठप हो गया है। गोंडा को लखनऊ से जोड़ने वाली सड़क पर पानी भरने लगा है, अगर पानी बढ़ा तो गोंडा का राजधानी से संपर्क कट सकता है। बाढ़ की विभीषिका के आगे बलरामपुर प्रशासन लाचार दिख रहा है। 14 छोटी बड़ी नाव तथा चार स्टीमर लेकर पीएसी तथा पुलिस के जवान प्रभावित क्षेत्र में लोगों की मदद कर रहे हैं।

इधर, बैराजों से छोड़े गए पानी की वजह से जिले के गांजरी क्षेत्र में बाढ़ की हालत और भयावह हो गई है। दो लोग बाढ़ के पानी में बह गए, जिनमें से एक की मौत हो गई। 173 गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे बाढ़ग्रस्त गांवों की संख्या बढ़कर 425 के करीब हो गई है। लगभग सभी गांवों का मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है। अंबेडकरनगर में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बाराबंकी की तीन तहसीलों के करीब 100  गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। फैजाबाद में सरयू का रूप रौद्र होता जा रहा है।

बाढ़ बचाव कार्य के लिए 51 करोड़ जारी

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सरकार ने जिलों को बाढ़ व बचाव कार्य के लिए 51 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने रविवार को प्रदेश की बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के बाद बताया कि  बाढ़ से जलमग्न हुए क्षेत्रों के करीब 17 हजार लोगों को 73 राहत शिविरों में रखा गया है। वहां खाने-पीने की सामग्री, साफ पानी व इलाज की मुकम्मल व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित जिलों के समस्त प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों को अस्पतालों पर ही निवास करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जरूरत पर उनको तत्काल मदद मिल सके। प्रमुख सचिव राजस्व व राहत आयुक्त किशन सिंह अटोरिया स्वयं मुख्यालय से बचाव व राहत कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं।

राजनाथ ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ने बाढ़ से निपटने में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि केंद्र के अधिकारियों से भी प्रदेश का पूरा संपर्क बना हुआ है। एनडीआरएफ के सचिव ने फोनकर हर संभव मदद की बात कही है। एनडीआरएफ के जवाब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव व राहत कार्य में पहले से ही मदद कर रहे हैं। केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने नेपाल के अधिकारियों से बाढ़ को लेकर वार्ता की है।

संतकबीरनगर और बलिया में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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मुख्य सचिव ने बताया कि फैजाबाद, आजमगढ़ व संतकबीरनगर जिलों में आगे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इस लिहाज से वहां के जिला प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। ये अधिकारी आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का बंदोबस्त करने के साथ वहां के लोगों को अलर्ट करेंगे। फैजाबाद व आजमगढ़ जिले के क्रमश: 10 व 13 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का कहर आगे संतकबीरनगर और बलिया तक बढ़ सकता है।

पहाड़ों की बरसात से नदियां फिर उफनी
कुछ दिनों की खामोशी के बाद नदियों में फिर हलचल पैदा हो गई है। गंगा, रामगंगा, ढेला और कोसी का जलस्तर लोगों को बेचैन कर रहा है। पहाड़ी इलाकों में होने वाली बरसात से सबसे ज्यादा असर गंगा पर पड़ रहा है। गंगा का जल स्तर तेजी के साथ बढ़ा है। मंडी धनौरा क्षेत्र के खादर वाले इलाके में गंगा आबादी के करीब तक पहुंच गई है। मौजूदा समय में रामगंगा का जलस्तर 190.3 मीटर तक पहुंच गया है। रामगंगा का डेंजर लेबल 190.60 मीटर पर है। कालागढ़ डैम का जलस्तर 357.7 मीटर पर पहुंच गया है। जिले के गुन्नौर तहसील के 24 गांवों पर उफनी गंगा का खतरा बना हुआ है। इन सभी गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

असम में बाढ़ की स्थिति नाजुक

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ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण ऊपरी और मध्य असम में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है। असम और पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण लखीमपुर, धेमाजी, सोनितपुर, नागौन, मोरीगौन और डिब्रूगढ़ जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

लखीमपुर में बाढ़ के पानी की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई। काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क और पोबितोरा वन्यजीव अभ्यारण्य में भी पानी भर गया है जिस कारण जंगली जानवर ऊंचाई वाले इलाके में चले गए हैं।

ब्रह्मपुत्र के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप मजुली की स्थिति भी भयानक बनी हुई है।

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