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क्या थी राजीव गांधी की मुश्किल, इंदिरा को करना पड़ा फोन?

Mon, 07 Apr 2014 09:20 PM IST
Updated Mon, 07 Apr 2014 09:20 PM IST
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flashback of rajiv gandhi and indira gandhi

देश की धाकड़ प्रधानमंत्री का बेटा और एकछत्र राज्य कर रही कांग्रेस जैसी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव को आज कोई कार में जैक लगाकर टायर बदलता देखे तो हैरत में पड़ जाएगा लेकिन करीब 32 साल पहले की एक रात राजीव गांधी ने सीबीगंज में यही सब किया।

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सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल नानकमता (उत्तराखंड) जाते वक्त उनकी कार का टायर पंक्चर हुआ तो उन्होंने सहज भाव से खुद जेक लगाकर गाड़ी का टायर बदला। तब जाकर उनका काफिला शहर में आया।
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कांग्रेस नेता स्वर्गीय रामस्वरूप शुक्ल के बेटे और इलाहाबाद बैंक के संचालक मंडल के सदस्य अजय शुक्ल उस समय बीएससी कर रहे थे।

दूसरी तरफ से लाइन पर थी इंदिरा गांधी

flashback of rajiv gandhi and indira gandhi

तब की यादें ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि सन 1982 में यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रामसिंह खन्ना की कोठी पर रात के एक बजे अचानक फोन की घंटी घनघनाने लगी। कोठी पर कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष पं. रामस्वरूप शुक्ल और रामसिंह खन्ना सो रहे थे।

फोन की आवाज से रामस्वरूप शुक्ल की नींद खुली। तीन बार घंटी बजी लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया लेकिन चौथी बार अनमने ढंग से फोन उठाया तो दूसरी तरफ से लाइन पर थे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राजनीतिक सलाहकार आरके धवन।

आरके धवन ने कहा कि इंदिरा जी खन्ना जी से जरूरी बात करना चाहती हैं। पंडित जी ने तुरंत रामसिंह खन्ना को उठाकर इंदिरा जी से बात कराई।

राजीव ने खुद बदला अपनी कार का टायर

flashback of rajiv gandhi and indira gandhi

इंदिरा गांधी ने खन्ना को बताया कि राजीव गांधी नानकमता जाने के लिए एक या दो घंटे में बरेली पहुंचने वाले हैं। उनको नानकमता तक पहुंचाने में मदद कर दें। पं. रामस्वरूप शुक्ल ने तुरंत पांच कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बेटे अजय शुक्ल को राजीव गांधी को रिसीव करने के लिए सीबीगंज भेजा।

राजीव गांधी की गाड़ियों का काफिला सीबीगंज से शहर की ओर आ रहा था। वह अपनी एंबेसडर कार खुद चला रहे थे। इसी बीच राजीव गांधी की गाड़ी पंक्चर हो गई। उनके साथ आए नेता निर्मल पंत, अरुण सिंह, मोहन सिंह और अवनीश कुमार गाड़ी से नीचे उतरकर जैक लगाने लगे। राजीव गांधी खुद गाड़ी से उतरे और सबको एक ओर हटाकर खुद जैक लगाया और तुरत-फुरत टायर बदलकर नया टायर लगा।

अजय शुक्ल को उस समय कैमरा उपलब्ध न होने से वह दृश्य कैद नहीं कर पाने का अफसोस है। वहां से राजीव गांधी का काफिला रामसिंह खन्ना की कोठी पर पहुंचा। यहां कुछ देर रुककर उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। कांग्रेसी उनको नानकमता जाने के लिए पीलीभीत रोड तक छोड़ आए।

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