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वो 5 कदम जो घटाएंगे भारत और ब्रिटेन की दूरी

Wed, 11 Nov 2015 03:40 PM IST
Updated Wed, 11 Nov 2015 03:40 PM IST
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Five steps which reduce the gap of India and Britain

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 से 14 नवंबर तक ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। इससे पहले आखिरी बार 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ब्रिटेन के सरकारी दौरे पर गए थे। लेकिन इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चार बार भारत के सरकारी दौरे पर आ चुके हैं।

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प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अपने 2010 और 2013 के भारतीय दौरों से पहले विपक्ष के नेता के रूप में भी भारत आए थे। लेकिन उनकी दूरंदेशी अब तक रंग नहीं लाई है।
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पांच साल पहले कैमरन ने कहा था कि दोनों देशों के बीच 2015 तक आपसी व्यापार 14 अरब डॉलर से बढ़कर दोगुना हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि भारत और ब्रिटेन के संबंध 'पसंदीदा भागीदारी' वाले होने चाहिए। डेविड कैमरन की अनथक कोशिशों के बावजूद द्विपक्षीय संबंध में फीकापन बना हुआ है।
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क्या नरेंद्र के दौरे से दोनों देशों के पुराने लेकिन बेजान रिश्तों में नई जान फूंकी जाएगी? इससे भी अहम सवाल कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को 'पसंदीदा भागीदारी' बनाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

क्या करे ब्रिटेन

Five steps which reduce the gap of India and Britain

पूर्व भारतीय राजनयिक राजीव डोगरा लंदन में भारतीय दूतावास में एक बड़े ओहदे पर काम कर चुके हैं और दोनों देशों में रिश्तों को बढ़ाने की कोशिश का एक हिस्सा भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्ता खट्टा-मीठा है। दोनों देशों को कई कदम उठाने पड़ेंगे तब ही रिश्ते से खट्टापन जाएगा। दूसरी तरफ गेटवे हाउस के राजऋषि सिंघल के अनुसार पहले ब्रिटेन को कई अहम कदम उठाने चाहिए।

1- सबसे पहले उन्हें अपने दूतावास और काउंसलेट के दरवाजे खोलने चाहिए। जब तक वह किले की तरह रहेंगे तो भारतीयों को पता नहीं चेलगा कि ब्रिटेन की क्या क्षमताएं हैं।

2- वीजा सुविधाएं आसान करनी चाहिए। ब्रिटेन के लिए वास्तविक वीजा हासिल करने वालों को यह लगना चाहिए कि उनपर कोई एहसान नहीं किया जा रहा है। भारतीय छात्रों को वीजा देकर उन्हें पढ़ाई खत्म होने के तुरंत बाद वापस भेजने का कदम सराहनीय नहीं है। भारत से ब्रिटेन जाने वाले छात्रों के लिए वीजा के प्रावधान आसान करने चाहिए।

3- ब्रिटेन में भारतीय समुदाय और भारतीय मूल के लोग सफल और निष्ठावान हैं और ऐसे में उनके साथ भेद-भाव हटाने की कोशिश करनी चाहिए। दुनिया में कहीं भी नस्ली बुनियाद पर हमले होते हैं तो ब्रिटेन के अखबार उसे सुर्खियों में जगह देते हैं लेकिन अगर ब्रिटेन में किसी भारतीय के खिलाफ हमला होता है तो उसे
मीडिया में जगह नहीं मिलती।

4- ब्रिटेन को कश्मीर के मुद्दे पर अपना पक्ष इस तरह से रखना चाहिए: "हमारा इसमें दखल नहीं है। ये भारत के बीच का आपसी मामला है"

5- ब्रिटेन को ये समझना होगा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। यहां निवेश के अवसर असीम हैं।

क्या करे भारत?

Five steps which reduce the gap of India and Britain
1- भारत को चाहिए कि रक्षा क्षेत्र में ब्रिटेन से करीबी तालमेल करे। ब्रिटेन इसमें काफी आगे है और मेड इन इंडिया के तहत इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की भारी गुंजाइश है।

2- मुंबई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर काम शुरू हो रहा है, जिसमें विदेशी निवेश की काफी जरूरत है। ब्रिटेन इसमें निवेश करना चाहता है, लेकिन इसमें काम धीमी गति से चल रहा है जिसे तेज करने की जरूरत है। भारत को ब्रिटेन के बड़े निवेशकों को लुभाना चाहिए। इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में मजबूती आएगी

3-  भारत को चाहिए कि ब्रिटेन से वह जैव प्रौद्योगिकी में नई खोजों के क्षेत्र में सहयोग करे। इस क्षेत्र में ब्रिटेन काफी आगे है।

4- पूर्वव्यापी कर मुद्दा दोनों देशों के बीच रिश्ते में आड़े आ रहा है। वोडाफोन का पूर्वव्यापी कर मुद्दा इसका उदाहरण है। हालांकि ये मामला अदालत में है लेकिन भारत इस तरफ ध्यान दे सकता है।

5- भारत के सामने चुनौती है कि ब्रिटेन जैसे देशों को अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अपनी नीति के निकट लाए। भारत चाहता है कि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र और दूसरे बहुराष्ट्रीय संस्थानों में भारत का साथ दे।
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