जगेंद्र की मौत के मामले में 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड
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शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के मामले में मुख्य आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा पर कार्रवाई को लेकर चौतरफा घिरी प्रदेश सरकार ने शनिवार को तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय समेत उन सभी पांच पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया, जो जगेंद्र के घर दबिश देने गए थे। हालांकि मंत्री पर कार्रवाई को लेकर सरकार अब भी मौन है।
इधर, आईजी (नागरिक सुरक्षा) अमिताभ ठाकुर ने मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इस बीच, वी द पीपल संस्था ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सीबीआई जांच की मांग वाली वाली याचिका दायर कर सरकार पर और दबाव बढ़ा दिया है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
आईजी कानून-व्यवस्था ए. सतीश गणेश ने शनिवार को बताया कि शाहजहांपुर में पत्रकार की मौत के मामले में आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय, सब इंस्पेक्टर क्रांतिवीर सिंह, हेड कांस्टेबल सुभाष चंद्र यादव, सिपाही उदयवीर व मंसूर को निलंबित कर दिया गया है। सभी पुलिस कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। इनके बयानों की वीडियोग्राफी होगी। इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय इन दिनों झांसी में तैनात थे। श्रीप्रकाश राय को एसएसपी झांसी ने निलंबित किया है। जबकि शाहजहांपुर में तैनात अन्य चार पुलिसकर्मियों को एसपी शाहजहांपुर ने सस्पेंड किया है।
सुबूत मिलने पर मंत्री पर होगी कार्रवाई
आईजी ने बताया कि जगेन्द्र सिंह के बेटे राघवेन्द्र ने पुलिस इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय सहित तीन-चार अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ शाहजहांपुर में घटना वाले दिन ही एक जून को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में राय के साथ ही चार अन्य की पहचान करने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
आईजी ने आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा पर कार्रवाई के सवाल पर सफाई दी है कि यह गंभीर प्रकरण है। पुलिस सुबूत जुटा रही है। साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक मंत्री से कोई पूछताछ नहीं की गई है।
जगेंद्र सिंह को जलाने की घटना 1 जून की है। सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस कर्मियों को तत्काल क्यों नहीं निलंबित किया गया जबकि रिपोर्ट उसी दिन दर्ज हो गई थी। यही नहीं, राय के अलावा शेष पुलिस वाले शाहजहांपुर में ही रहे। आशंका है कि इस दौरान उन्होंने साक्ष्यों से भी कोई छेड़छाड़ न कर डाली हो। यह सवाल भी उठ रहा है कि आरोपित राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा पर हाथ डालने से पुलिस बच क्यों रही है। जाहिर है कि कहीं न कहीं दबाव काम कर रहा है।
क्या है मामला
जगेंद्र आवास विकास कॉलोनी स्थित अपने आवास पर एक जून दबिश के दौरान बुरी तरह झुलस गए थे। जगेंद्र ने कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय समेत कुछ पुलिस कर्मियों पर पेट्रोल छिड़कर जिंदा जलाने का आरोप लगाया था और मृत्यु पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट को भी यही बयान दिया था।
वहीं, निरीक्षक श्रीप्रकाश राय का कहना था कि जगेंद्र ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद आग लगा ली थी। आठ जून को जगेंद्र की मौत के बाद नौ जून को उनके बेटे राहुल की ओर से प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय समेत छह लोगों को नामजद करते हुए हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई।
पत्रकार जगेंद्र के खुटार स्थित आवास और शाहजहांपुर की पुरानी आवास विकास कॉलोनी स्थित घर का निरीक्षण करने के बाद आईजी (नागरिक सुरक्षा) अभिताभ ठाकुर ने पूरे मामले में पुलिस, प्रशासन की गंभीर लापरवाही मानी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद कानूनन डीआईजी को घटनास्थल का निरीक्षण करना चाहिए था। डीएम और एसपी द्वारा भी घटनास्थल का निरीक्षण नहीं करना तो बहुत बड़ी लापरवाही है।
बोले, जगेंद्र के मकान में पुलिस के कूदने के बाद आग लगी। जगेंद्र कोई इतने बड़े अपराधी नहीं थे कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश में इतनी बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी पहुंचे। आसपास के लोगों से बातचीत में पता चला है कि जगेंद्र के खिलाफ लिखा गया मुकदमा फर्जी है। आईजी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
पुलिस ने फिर बदला ताला
पुलिस ने फॉरेंसिक टीम की जांच के बाद जगेंद्र के आवास विकास कॉलोनी स्थित घर में नया ताला जड़ दिया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शनिवार को जब आईजी अमिताभ ठाकुर ने पुलिस से ताला बदलने के बाबत सवाल किए तो उन्हें बताया गया कि ताला जगेंद्र का ही है। इसकी चाभी भी पड़ोस में रहती है। ठाकुर ने जब चाभी लाने को कहा तो वहां मौजूद पुलिस कर्मी बगले झांकने लगे। कुछ देर बाद घर में पुराना ताला डाल दिया गया।