छह राज्य, 280 लोकसभा सीटें और प्रधानमंत्री कौन?
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15वीं लोकसभा चुनाव में इस बार 81 करोड़ से भी ज्यादा मतदाता हिस्सा ले सकेंगे। इनमें से 50 फीसदी मतदाता केवल देश के छह राज्यों से हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची में 47.6 फीसदी महिलाएं हैं लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में सबसे कम 44.57 फीसदी महिला वोटर हैं।
महिलाओं के मामले में उत्तर प्रदेश की भी स्थिति अच्छी नहीं है यहां कुल मतदाताओं में 45.20 फीसदी महिलाएं हैं। उत्तर प्रदेश्ा में लोकसभा की कुल 80 संसदीय सीटें है जो हर लोकसभा चुनावों में अपनी अहम भूमिका निभाता है।
चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव से पहले तैयार मतदाता सूचियों के आंकड़े जारी कर दिए हैं। देश के 28 राज्यों तथा सात केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 81.45 करोड़ से भी ज्यादा मतदाता इस सूची में शामिल हैं। संख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है। यहां 134351257 (कुल मतदाताओं का 16.43 फीसदी) वोटर रजिस्टर्ड हुए हैं।
पांचों राज्यों में देश के 49.59 फीसदी मतदाता
दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र तथा तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल का नाम आता है। इनमें यदि आंध्र प्रदेश तथा बिहार के भी मतदाताओं को जोड़ दिया जाए तो इन्हीं पांचों राज्यों में देश के 49.59 फीसदी मतदाता हैं।
लोकसभा चुनाव में इन राज्यों की अहम भूमिका होगी। मतदाताओं की संख्या के मामले में सिक्किम सबसे छोटा राज्य है। संसदीय सीटों के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य महाराष्ट्र है जहां से 48 सांसद चुने जाते हैं। वहीं पश्चिम बंगाल से 42, आंध्र प्रदेश से 42, बिहार से 40 और कर्नाटक से 28 सांसद चुन कर संसद में आते हैं।
यह भी कह सकते हैं कि 'आमबिकप' राज्यों में आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की राय भी नया प्रधानमंत्री चुनने में अहम होगी।
राजनीतिक पार्टियों का गठजोड़!
उत्तर प्रदेश, आंध्रप्रेदश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में संसदीय सीटों की कुल संख्या 280 है। अगर बहुमत के हिसाब से देंखे, तो इस छह राज्यों की सीटों का योग बहुमत से आठ अधिक है। संख्या के हिसाब से ये सभी राज्य इतनी ताकत रखते हैं कि अपने दम पर ही नए प्रधानमंत्री को चुन सकते हैं। पर राजनीति अनुमानों का नहीं वोट की ताकत का सच है और इसका अंतिम फैसला मतदाता ही करता है।
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद स्थिति यह है कि आंध्र प्रदेश की 42 सीटों में 33 सीटें कांग्रेस, टीआरएस, टीडीपी और अन्य के पास क्रमश 33,6,2,1 सीटें हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस, बीजेपी, एनसीपी, शिवसेना और अन्य के पास क्रमश 17, 9, 8, 11, 3 सीटें हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस, बीजेपी, जनता दल सेक्युलर के पास क्रमश 6, 19, 3 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, बीजेपी, अन्य के पास क्रमश 23, 21, 20, 10, 6 सीटें हैं।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी, सीपीआईएम, अन्य, कांगेस, बीजेपी के पास क्रमश 19,9,7,6,1 सीटें हैं। वहीं बिहार में जनता दल यूनाइटेड, बीजेपी, आरजेडी, कांग्रेस और अन्य के पास क्रमश 20,12,4,2,2 सीटें हैं।
मतदाताओं का गणित
चुनाव आयोग की सूचना के अनुसार देश में 52.4 फीसदी पुरुष तथा 47.6 फीसदी महिला मतदाता हैं। देश में 28431 मतदाता ऐसे भी हैं जो न पुरुष हैं न स्त्री। उन्हें अन्य की श्रेणी में मतदाता सूची में शामिल किया गया है।
तीसरी श्रेणी में सर्वाधिक 8453 लोग कर्नाटक राज्य में मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है। यूपी यहां दूसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश में 6630 अन्य श्रेणी के मतदाता रजिस्टर हुए हैं।
पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा तथा जम्मू एवं कश्मीर सहित 17 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां अन्य श्रेणी के एक भी मतदाता नहीं हैं।