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आप की जबरदस्त जीत में छिपे हैं 'नई राजनीति' के ये 5 सूत्र

Wed, 11 Feb 2015 03:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Feb 2015 03:23 PM IST
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AAP landslide victory has eqautions of 'New Political Era'

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने असंभव को संभव कर दिखाया है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद सरपट दौड़ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अश्वमेध रथ को दिल्ली विधानसभा चुनाव में थाम दिया। आप ने चुनाव से पहले ही भाजपा के विजयी रथ को दिल्ली में रोकने का दावा किया था, जिसे उन्होंने कर दिखाया।

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इस चुनाव में दिल्ली के मतदाताओं ने जात-पांत और धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर ‘आप’ का साथ दिया। युवाओं ने भी दिल खोल कर समर्थन दिया। दिल्ली के मतदाताओं ने केजरीवाल में विश्वास जताया और एकमत से साथ दिया। यहां यह बताना दिलचस्प होगा कि मतदान से चंद दिन पहले ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने ‘आप’ के समर्थन में मतदान करने की अपील की लेकिन आप ने खुलकर इसका विरोध किया था।
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इसके बाद भी मुस्लिम समुदाय ने आप के समर्थन में जमकर मतदान किया। ऐसा कहा जा रहा था कि ‘आप’ को झुग्गी-झोपड़ी और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग ज्यादा वोट करेंगे लेकिन नतीजे बताते हैं कि ऐसा नहीं हुआ, पॉश इलाकों में भी जमकर ‘आप’ के पक्ष में मतदान हुआ।

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सूत्र-2- परंपरागत राजनीति से नेताओं का काम नहीं चलेगा

AAP landslide victory has eqautions of 'New Political Era'

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए जनादेश में कई संकेत छिपे हैं। पहला यह कि जात-पांत की राजनीति को मतदाताओं ने एक स्वर में खारिज कर दिया है। दूसरा मतदान से पहले की तिकड़मों को मतदाता खूब समझता है और इस तरह के तमाशों से अपना इरादा नहीं बदलता।

तीसरा मतदाता को अब सब कुछ तत्काल चाहिए, वह ज्यादा लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहता। अगर नेता कोई वादा कर रहे हैं तो उसे पूरा करने की कूवत भी रखें। विश्लेषक मानते हैं कि यह जनादेश नई राजनीतिक संस्कृति के उदय का प्रतीक है।

राजधानी के लोगों ने परंपरागत राजनीति के प्रति नाखुशी जाहिर की है। खासकर युवाओं ने कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियों की तुलना में तेज तर्रार तेवरों से लैस आप को वरीयता दी। आप की सोशल मीडिया में पैठ ने युवाओं को लुभाने की रणनीति को धार भी दी।

सूत्र-3, 4, 5- सांप्रदायिकता की जगह विकास, नौकरी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन

AAP landslide victory has eqautions of 'New Political Era'

एक और खास बात यह समझने वाली है कि जनादेश में सांप्रदायिकता की जगह विकास, नौकरियों और स्थानीय सुशासन को वोटरों ने तरजीह दी है।

हालांकि विशेषज्ञ यह कहने से भी नहीं चूकते कि अरविंद केजरीवाल अभी सही मायनों में नई राजनीति के उचित नुमाइंदे नहीं बन पाए हैं। उन्हें घिसी पिटी राजनीतिक चालों को छोड़ना होगा। मसलन बिजली-पानी कम दरों पर उपलब्ध कराने जैसी लोकलुभावन बातों से नई राजनीति का विचार कुंद ही होगा। साथ ही भड़काऊ भाषणों से भी बचना होगा। आप के कुछ नेताओं ने पार्टी के पिछले कार्यकाल में गैर जिम्मेदाराना बयान दिए थे। इन सब बातों पर आप को गंभीरता से विचार करना होगा।

हालांकि केजरीवाल ने नतीजे आने के बाद इसका अहसास किया। उन्होंने कहा कि यह बड़ी जिम्मेदारी है, हमें अहंकार से दूर रहना होगा। वहीं उनका यह भी कहना है कि आप अपने भ्रष्टाचार हटाने के मुद्दे पर चलती रहेगी, सही दिशा का बोध कराता है। इसके अलावा उन्होंने चुनाव में धन-बल कम करने, जन कल्याण और स्थानीय सुशासन पर जोर देकर लोगों को अपने पक्ष में किया।

भाजपा-कांग्रेस के लिए सबक

AAP landslide victory has eqautions of 'New Political Era'

विशेषज्ञों का कहना है कि शायद नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के चुनाव पर फोकस कर गलती की। मोदी राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए थे, उन्हें हर चुनाव में उतरने की जरूरत नहीं है।

वहीं कांग्रेस को अपने तौर तरीके जल्द बदलने होंगे। पार्टी का एक भी सीट नहीं जीतना खतरनाक संकेत है।

पार्टी को समझना होगा कि वंशानुगत शासन से बाहर निकलना जरूरी है। कारपोरेट राजनीति के दिन अब ढलते दिख रहे हैं। अब वक्त नागरिक हितैषी, उदार और परिपक्व राजनीति का है। आप और सभी दलों को इसी दिशा में बढ़ना होगा।

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