'वे शवों को गोली मारकर मौत की तसल्ली कर रहे थे'
पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकियों ने घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की। 132 बच्चों समेत 141 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। कैसा था वह खौफनाक मंजर, बताया हमले में बच निकले और शहर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती किशोर छात्र ने। पढ़िए, दिल दहला देने वाली दास्तां-
मैं हमले के वक्त स्कूल ऑडिटोरियम में कैरियर गाइडेंस सत्र में अपने सहपाठी के साथ था। तभी अचानक सुरक्षा बलों की वेशभूषा में चार आतंकी गोलियां बरसाते हुए घुसे। वे जोर जोर से मजहबी नारे लगा रहे थे। हम आनन-फानन में सीटों के नीचे छिपने की कोशिश करने लगे। इतने में ही एक आतंकी चिल्लाया-‘सीटों और बेंचों के नीचे कई छात्र छिपे हैं। वहां जाओ और उन्हें मारो।’
मैंने बेंच के नीचे से झांककर देखा कि काले जूतों का एक जोड़ा पहने कोई चला आ रहा है। जो शायद हमारी तलाश में था। ऑडिटोरियम में की जा रही अंधाधुंध गोलीबारी से अचानक मेरे दोनों पैरों में गोली लग गई। मुझे भयानक दर्द हो रहा था। मगर मैंने तय किया कि मैं मौत से खेलूंगा।
वह हर शव को गोली मार रहा था
मैंने सबसे पहले अपनी टाई को मोड़कर अपने मुंह में दबाया ताकि मेरे मुंह से डर के मारे कोई चीख न निकल जाए। मैं वहीं अपनी सांसे रोककर और आंखें बंद कर लेट गया।
बडे़ काले जूतों वाला शख्स हमारे करीब यह देखने आया कि कोई जिंदा तो नहीं। वह हर शव को गोली मार रहा था। मैं भी अपनी आंखें बंद कर गोली लगने का इंतजार कर रहा था, मगर वह आया मुझे अपनी बंदूक से हिला-डुलाकर चला गया। शायद यह मौत की छुअन थी। वह आतंकी फिर वहां से चला गया।
उसके जाने के बाद मेरा शरीर काफी कांप रहा था। आखिरकार मुझे बेहोशी आ गई। मैं मौत को इतने करीब से महसूस करने के अहसास को नहीं भूल पाऊंगा।