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देश में मिला इबोला का पहला मरीज

Wed, 19 Nov 2014 06:58 PM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Wed, 19 Nov 2014 06:58 PM IST
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india isolates first patient ebola case

अफ्रीकी देशों में सैकड़ों लोगों की जान ले चुकी घातक बीमारी इबोला ने देश में भी दस्तक दे दी है। देश में इस बीमारी का पहला मामला दिल्ली में सामने आया है। अफ्रीकी देश लाइबेरिया से भारत लौटे एक भारतीय नागरिक में खतरनाक इबोला वायरस पाया गया है। इसके बाद से ही उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर तैयार विशेष सुविधा वाले स्थान पर रखा गया है।

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स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक यह 26 वर्षीय युवक 10 नवंबर को यहां पहुंचा था और लाइबेरिया में वह पहले ही इबोला का इलाज करा चुका है। उसमें इस खतरनाक बीमारी के कोई लक्षण तो नहीं पाए गए, लेकिन उसके वीर्य का सैंपल पॉजिटिव पाया गया है। इसी वजह से डॉक्टरों ने उसे अलग वार्ड में रखा है। मंत्रालय ने बयान में कहा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि इस संबंध में हर तरह की सावधानियां बरती गई हैं।
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मंत्रालय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि इबोला के इलाज के दौरान भी मूत्र के जरिए यह वायरस बाहर फैल सकता है। हालांकि उसके वीर्य में मिले वायरस की वजह से यह संभावना बढ़ गई है कि इलाज के 90 दिनों के भीतर यौन मार्ग के माध्यम से उसके शरीर में आया। युवक को तब तक दिल्ली एयरपोर्ट स्वास्थ्य संगठन की विशेष सुविधा वाले अलग वार्ड में ही रखा जाएगा, जब तक उसके शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ के टेस्ट नेगेटिव नहीं हो जाते। पूरी तरह से फिट होने के बाद ही उसे छुट्टी दी जाएगी। इस मरीज को लाइबेरियन सरकार से मेडिकल क्लीयरेंस का सर्टिफिकेट भी हासिल था।
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यही नहीं यहां जांच के दौरान भी उसके तीन ब्लड सैंपल नेगेटिव पाए गए थे और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के तहत उसे फिट करार दिया गया है। हालांकि मंत्रालय ने कहा कि वायरस लंबे समय तक मूत्र और वीर्य में रह सकता है। मालूम हो कि लाइबेरिया और सिएरा लियोन में इबोला से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।

बेहद गंभीर मामला : नड्डा
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि इबोला का यह बेहद गंभीर खतरे वाला मामला है। मरीज में इबोला के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे और उसके सभी शुरुआती टेस्ट भी नेगेटिव थे। बाद में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स (एनआईबी) में बॉडी फ्लूड्स की जांच कराई गई तो दोनों जगह से पॉजिटिव रिपोर्ट आई। हम मामले पर पूरी नजर रखे हुए हैं।

क्यों खतरनाक हैं इबोला वायरस

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दरअसल इबोला के वायरस मानवीय प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलने में सक्षम होते हैं। दूसरा इसकी चपेट में आने के बाद रोगी के शरीर में रक्त की श्वेत रुधिर कणिकाएं (डब्लूबीसी) मृत हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में अगर रोगी का शरीर पूरी तरह इसका मुकाबला करने में सक्षम नहीं है तो वायरस उसे अपनी चपेट में ले लेता है। वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं पता लगाए पाए हैं कि कोई व्यक्ति इसकी चपेट में कैसे आता है।

- 05 हजार लोग अब तक पश्चिम अफ्रीका में फैली इस बीमारी से मारे जा चुके हैं  
- गिनी, सिएरा लियोन और लाइबेरिया और नाइजीरिया सब से ज्यादा प्रभावित हैं इस बीमारी से

रोग के लक्षण

शुरुआत में एकाएक बुखार आता है, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है, मांसपेशियों में दर्द होता है और गले में भारी खराश हो जाती है। इसके बाद उल्टी और दस्त शुरू हो जाते हैं। शरीर के अंदर और बाहर खून निकला शुरू हो जाता है। 

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