जेटली ने दिखाया भाजपा घोषणा पत्र का पहला एपिसोड
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यूपीए के नीतिगत पंगुपन के दौर से देश को निकालकर विकास की पटरी पर वापस लाने के वादों पर सत्ता में आई मोदी सरकार के पहले बजट की आर्थिक पंडित चाहे जैसी व्याख्या करें मगर सियासी रूप से यह पूरी तरह चुनावी वादों का बजट है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजटीय ऐलान वस्तुत: भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र का पहला एपिसोड है। बजट में घोषणा पत्र में किए गए अधिकांश वादों को न केवल जगह दी गई है बल्कि तमाम योजनाओं के नाम भी हूबहू पार्टी घोषणा पत्र के अनुरूप हैं। स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ...बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना कुछ ऐसे ही नाम हैं।
आम बजट में 100 स्मार्ट सिटी बनाने, गंगा की सफाई, हर राज्य को एम्स, युवाओं को रोजगार, मध्य वर्ग के साथ उभरते मध्य वर्ग को रोजगार और राह, मदरसों का आधुनिकीकरण, पूर्वोत्तर और कश्मीर के विकास के लिए किए गए कई प्रावधान और घोषणाओं को भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के वादों में प्रमुखता से शामिल किया था।
मोदी सरकार का दिखा सकारात्मक रुख
पंगुपन के दौर से बाहर निकालने के लिए घोषणा पत्र में त्वरित फैसला करने के चुनावी वादे के अनुरूप आम बजट में बीमा, रक्षा और बैंकिंग क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाने का ऐलान वित्त मंत्री ने किया है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विनिर्माण सेक्टर को प्रोत्साहन, पूर्वोत्तर राज्यों तथा जम्मू और कश्मीर को खास तवज्जो भी इसी का हिस्सा है।
जेटली ने कोयला रायल्टी की दरों की समीक्षा कर राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने और जीएसटी लागू करने में भी राज्यों का ख्याल रखने की बात कह केंद्र-राज्यों के बीच बेहतर संबंधों की बुनियाद रखने का आगाज किया। बीजद सांसद कलिकेश सिंह देव ने भी माना कि मोदी सरकार का राज्यों के प्रति रुख ज्यादा सकारात्मक दिख रहा है।
चुनाव में मध्यम और उभरते मध्यम वर्ग ने भाजपा की झोली वोटों से भर दी तो बदले में वित्त मंत्री ने उन्हें अच्छे दिन लाने के वादों की पहली सौगात दी। आय कर में छूट की सीमा ढाई लाख करने और निवेश की सीमा बढ़ाने का तोहफा तो दिया ही, साथ ही आवास कर्ज पर ब्याज छूट की सीमा भी दो लाख कर दी गई।
घोषणा पत्र में भाजपा ने गांवों में गुजरात की तर्ज पर शहरी सुविधा देने के लिए रूरबन मिशन का वादा किया था। वित्त मंत्री ने रूरबन मिशन के साथ किसान टीवी चैनल के वादे को भी पहले बजट में ही पूरा करने का ऐलान कर दिया। चुनावी वादे में हर राज्य को एम्स देना भी था सो जेटली ने चार राज्यों में एम्स खोलने की घोषणा के साथ सभी राज्यों में एम्स की स्थापना का आश्वासन भी दिया। एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर के साथ मदरसों के आधुनिकीकरण का आगाज भी इसी बजट से वित्त मंत्री ने शुरू कर दिया है।