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इतिहास में पहली बार, HC के जज ने मांगा SC के जज से जवाब

Tue, 16 Feb 2016 01:20 PM IST
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:20 PM IST
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first case in indian judicial system

भारतीय न्यायपालिका में सोमवार को कुछ ऐसा हुआ, जो इससे पहले देश के न्यायिक इतिहास में कभी नहीं हुआ था। सोमवार की दोपहर, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के एक जज को किसी तरह केन्यायिक काम देने पर रोक लगा दी। लेकिन इसके कुछ देर बाद हाईकोर्ट के इस जज ने सुप्रीम कोर्ट केचीफ जस्टिस से ही लिखित जवाब मांग लिया।

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सोमवार दोपहर को सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्नन को कोई भी न्यायिक काम नहीं देने का निर्देश दिया। दरअसल न्यायमूर्ति सीएस कर्नन का तबादला कलकत्ता हाईकोर्ट कर दिया गया है। लेकिन कर्नन ने इस स्थानांतरण के आदेश पर ही रोक लगा दी।
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इसके बाद जस्टिस कर्नन को कोई न्यायिक काम देने  पर रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार द्वारा दाखिल उस याचिका पर दिया है, जिसमें जस्टिस कर्नन को न्यायिक काम न करने का निर्देश देने की गुहार की गई थी। रजिस्ट्रार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि ट्रांसफर आदेश मिलने के बाद जस्टिस कर्नन ने खुद स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने ही ट्रासंफर के खिलाफ आदेश जारी करने का निर्णय लिया।
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जज ने अपने तबादले के आदेश पर लगा दिया था स्टे

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सोमवार को इस सुनवाई की तारीख रखी गई थी। जिसकेबाद पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायमूर्ति सीएस कर्नन को कोई भी न्यायिक काम नहीं देने का निर्देश दिया। पीठ ने रजिस्ट्रार से इस आदेश की प्रति जस्टिस कर्नन को देने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि जस्टिस कर्नन चाहें तो इस अदालत के समक्ष आ सकते हैं। अगर वह ऐसा करते हैं तो उसका खर्च भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ेगा।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने लंच केपहले पारित किया था। लंच के बाद अदालत की कार्यवाही शुरू होते ही वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने पीठ केसमक्ष उल्लेख किया कि जस्टिस कर्नन ने आदेश पारित कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को जवाब देने के लिए कहा है। वरिष्ठ वकील ने पीठ से लंच केपूर्व दिए आदेश में फेरबदल करने की गुहार की है।

पीठ ने कहा कि उनका पूर्व आदेश प्रभावी रहेगा। हालांकि बाद में वेणुगोपाल द्वारा आग्रह करने केबाद पीठ ने कहा कि वह अपने फैसले में बदलाव कर देंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जज से किया अनुरोध

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कई बार विवादों में घिर चुके मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्नन ने कलकत्ता हाई कोर्ट के अपने तबादले के चीफ जस्टिस के आदेश पर ही रोक लगा दी।

जस्टिस कर्नन ने वर्ष 1993 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एस. रत्नावेल पांडियान की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उनके स्थानांतरण संबंधी चीफ जस्टिस का प्रस्ताव इस फैसले के खिलाफ है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से यह भी अनुरोध किया कि उनके कार्य अधिकार क्षेत्र में वह हस्तक्षेप न करें। बेहतर प्रशासन का हवाला देकर उनका कलकत्ता हाई कोर्ट में तबादला किया गया था।

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