'जन्मदिन का तोहफा', दिग्विजय के खिलाफ FIR दर्ज
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व्यापमं घोटाले में अपने ऊपर लगे आरोपों से आहत मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की घेराबंदी करने के लिए बीस साल पुरानी फाइलें खोलने की रणनीति अपनाई है। इसकी शुरुआत एक एफआईआर से हो गई है। धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज इस एफआईआर में दिग्विजय के अलावा विधानसभा के पूर्व स्पीकर श्रीनिवास तिवारी को आरोपी बनाया गया है।
जिस केस में एफआईआर हुई है, वह राज्य विधानसभा में 1993 से 2003 के बीच हुई नियुक्तियों से संबंधित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने 6 जुलाई 2005 को बीस साल पूर्व हुईं 17 नियुक्तियों की जांच सेवानिवृत्त जज शचींद्र द्विवेदी को सौंपी थी।
द्विवेदी कमेटी ने 23 जनवरी 2006 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें नियुक्तियों को अवैध करार दिया था और पूरा केस सीबीआई के हवाले करने की सिफारिश की थी। आठ साल पहले सीबीआई को यह मामला भेजा गया, लेकिन उसने राज्य सरकार को ही कार्रवाई करने को कह दिया। तब से यह प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़ा था।
जन्म दिन का तोहफा
शनिवार को दिग्विजय सिंह का जन्म दिन था। एफआईआर की जानकारी होने पर उन्होंने ट्वीट किया कि शिवराज जी ने मुझे जन्मदिन का जो उपहार दिया है, उसके लिए शुक्रिया। इससे अधिक उपयुक्त मौका क्या हो सकता था। अब शिवराज सिंह को व्यापमं के साथ यह मामला भी सीबीआई को सौंप देना चाहिए। क्या वह ऐसा करेंगे।
FIR के बावजूद MP के राज्यपाल
मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद वे अपने पद पर बने हुए हैं। उन्होंने अभी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। राज्यपाल पिछले चार दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वे राष्ट्रपति से मुलाकात का वक्त चाहते हैं, जिससे कि वे व्यापमं घोटाले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर इस्तीफा सौंप सकें।
मगर राष्ट्रपति उन्हें वक्त नहीं दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मुलाकात की कोशिश की है, मगर किसी से उन्हें समय नहीं मिला।
गिरफ्तारी से बचने की कोशिश
राज्यपाल ने एफआईआर रद्द कराने की दिशा में कानूनी सलाह लेना भी शुरू किया है। कोशिश की जा रही है कि सीआरपीसी की धारा 382 के तहत एफआईआर रद्द करा दी जाए। चूंकि व्यापमं घोटाले में कांग्रेस के आरोपों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद भी राज्यपाल को हटाए जाने के पक्ष में नहीं हैं।
लिहाजा यादव को हर तरफ से ऑक्सीजन मिली हुई है। ऐसे में वह धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप में केस दर्ज होने के बावजूद राज्यपाल बने हुए हैं। न तो वह इस्तीफा दे रहे हैं और न ही केंद्र सरकार उन्हें हटा रही है।