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बजट में चिदंबरम ने बांटी चुनावी रेवड़ियां

Mon, 17 Feb 2014 05:01 PM IST
Updated Mon, 17 Feb 2014 05:01 PM IST
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finance minister p chidambaram vote on account speech

यूपीए सरकार के अंतरिम बजट में वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने युवाओं, गृहणियों, किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा, सभी को खुश करने की कोशिश की है।

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कयास थे कि वित्तमंत्री बजट घाटा कम करने के लिए खर्च में कटौती की घोषणा कर सकते हैं। अर्थव्यव्था में सुधार के लिए कड़े कदमों की घोषणा की जा सकती है। हालांकि इसके विपरित चिदंबरम ने चुनावों को ध्यान में रखकर जमकर रेवड़ियां बांटी हैं।
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छात्र-छात्राओं को खुश करने के लिए शिक्षाऋण में छूट की घोषणा की गई है। सैन्यकर्मियों को 'वन रैंक-वन रैंक पेंशन' का तोहफा दिया गया है। मध्यवर्ग को खुश करने के लिए आयकर की दरों में बदलाव नहीं किया गया है।
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कार, मोबाइल फोन, साबुन और फ्रिज और एयर कंडिशनर सस्ते करने की घोषणा की गई है।

आर्थिक विकास दर 4.9 फीसदी रहने का अनुमान

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भारी शोर-शराबे के बीच पेश अंतरिम बजट में वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की दस वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

चिदंबरम ने कहा कि सितंबर 2008 से ही विश्व अर्थव्यवस्था विकासशील देश निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों 2008 से ही मंदी का शिकार है। लेकिन भारत इससे अछुता रहा है।

उन्होंने कहा कि चालू वित्तवर्ष की तीसरी और चौथी तिमाहियों में आर्थिक विकास दर 5.2 प्रतिशत से अधिक रहेगी। वर्ष 2013-14 में इसके 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

शिक्षा ऋण की ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा

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शिक्षा के लिए 67,398 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। चिदंबरम में स्टूडेंट्स को खुश करने के लिए शिक्षा ऋण की ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा की है।


उन्होंने बताया कि करीब नौ लाख छात्रों को इससे लाभ होगा और इससे तकरीबन 2600 करोड रुपए खर्च होंगे।

उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2009 से पहले लिए गए और 31 दिसंबर 2013 तक के सभी बकाया शिक्षा ऋणों की वसूली पर रोक लगाई गई थी।

अब सरकार 31 दिसंबर 2013 की स्थिति के अनुसार बकाया ब्याज की देनदारियों को चुकता करेगी लेकिन छात्रों को एक जनवरी 2014 के बाद की अवधि के लिए ब्याज चुकाना होगा।

चिदंबरम ने दी एक रैंक-एक पेंशन को मंजूरी

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चुनाव से पहले फौजियों के वोटों को अपने हक में करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने आज उनकी वर्षों पुरानी 'समान रैंक-समान पेंशन' की मांग स्वीकार कर ली और रक्षा बजट दस प्रतिशत बढाकर 2 लाख 24 हजार करोड़ करने की घोषणा की।

चिदंबरम ने बताया कि समान रैंक-समान पेंशन की मांग बहुत भावनात्मक मुद्दा थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है और इसे 2014 से लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रक्षा बजट में बीस हजार करोड़ की बढोत्तरी की गई है। पिछले साल का रक्षा बजट दो लाख तीन हजार करोड़ था जिसे अब दो लाख 24 हजार करोड़ कर दिया गया है।

इस मांग को पूरा करने पर सरकार को करीब 500 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करना होगा। यह मांगे माने जाने के संकेत पिछले सप्ताह ही मिल गए थे जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सैनिकों को आश्वासन दिया था कि इस मांग पर वह उनके साथ हैं। इस मांग को लेकर पूर्व सैनिक सड़कों पर उतर आए थे और अपना गुस्सा जताते हुए हजारों पूर्व सैनिकों ने अपने पदक भी राष्ट्रपति को लौटा दिए थे।

सस्ती होंगी कारें, निर्भया निधि के लिए 1000 करोड़

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महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थापित की गई निर्भया निधि के लिए अगले वित्त वर्ष में सरकार ने एक हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

अंतरिम बजट में अनुसूचित जाति उपयोजनाओं के लिए 48,638 करोड रुपए और जनजाती उपयोजना के लिए 30, 726 करोड रुपए का आबंटन किया गया है।

भारी मंदी से जूझ रहे देश के वाहन उद्योग को गति देने के लिए आगामी वित्त वर्ष के अंतरिम बजट में करों में बडी रियायत देने की घोषणा की गई है।

छोटी कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर और वाणिज्यिक वाहनों पर उत्पाद शुल्क को 12 से घटाकर 8 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। एसयूवी पर इसे 6 प्रतिशत कम कर 24 प्रतिशत किया जाएगा। बडी तथा मझौली कारों पर उत्पाद शुल्क जो 24 से 27 प्रतिशत है इसे 20 से 24 प्रतिशत किया गया है।

आठ लाख करोड़ रुपए के कृषि ऋण का लक्ष्य

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चिदंबरम ने अंतरिम बजट में किसानों को भी खुश करने की कोशिश की है। वर्ष 2014-15 के लिए आठ लाख करोड़ रुपए के कृषि ऋण का लक्ष्य रखा गया है।

वित्तमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए ब्याज में छूट की योजना 2014-15 में भी जारी रहेगी। इस योजना के तहत समय से ऋण अदा करने वाले किसानों को ब्याज में दो प्रतिशत सहायता तथा तीन प्रतिशत का प्रोत्साहन दिया जाता है।

इस प्रकार कृषि ऋणों पर प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत कम हो जाती है। इस योजना के तहत अब तक 23924 करोड़ रुपए की राशि जारी की गयी है।

अंतरिम बजट में ही किया गया था विनिवेश का ऐलान

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दस बजट पेश करने वाले मोरारजी देसाई के बाद चिदंबरम ने ही देश में सबसे ज्यादा बजट दिए हैं।

वर्ष 1991 में चंद्रशेखर सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने लेखानुदान में ही सरकारी कंपनियों के विनिवेश का ऐलान किया था। इसी तरह जसवंत सिंह ने भी 2004 के अंतरिम बजट में चुनाव से पहले कई तरह की टैक्स रियायतें दी थीं।

वर्ष 2009 में अंतरिम बजट तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पेश किया। तब उन्होंने आम आदमी को विकास के केंद्र में लाने पर जोर दिया था। चिदंबरम भी इस लेखानुदान में अप्रत्यक्ष करों में कुछ रियायतों के संकेत दे चुके हैं।

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