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वित्त मंत्री को बॉलीवुड की एक बार भी याद नहीं आई

Fri, 11 Jul 2014 12:43 AM IST
रवि बुले, सुरेन्द्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले, सुरेन्द्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई Updated Fri, 11 Jul 2014 12:43 AM IST
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सरकार के बजट ने फिल्म इंडस्ट्री को निराश किया। खास तौर पर फिल्म निर्माता, स्टूडियो और सिनेमाघर मालिक लंबे समय से आस लगाए बैठे थे कि नई सरकार उनकी सुनेगी और एंटरटेनमेंट टैक्स, सर्विस टैक्स, वैट समेत अलग-अलग राज्यों में लगने वाले विभिन्न करों से राहत देगी। लेकिन दो घंटे से ज्यादा के अपने भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक बार भी बॉलीवुड की याद नहीं आई। जबकि मोदी लहर में चुनाव जीतकर बॉलीवुड की शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, किरण खेर, परेश रावल, मनोज तिवारी और बाबुल सुप्रियो जैसी हस्तियां संसद में बैठी हैं। टीवी स्टार स्मृति ईरानी तो मंत्री हैं।

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जेटली ने फिल्म से जुड़े मामले में सिर्फ गोवा में हर साल आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह और पुणे के एफटीआईआई का जिक्र किया। विश्व मानचित्र पर गोवा की बढ़ती पर्यटन/आयोजन पहचान के कारण उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सभागार यहां बनाने की घोषणा की।
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साथ ही उन्होंने कहा कि पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) और कोलकाता स्थित सत्यजित रे फिल्म इंस्टीट्यूट को ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा दिया जाएगा। इन जगहों से पढ़-लिख कर सैकड़ों युवा हर साल फिल्म इंडस्ट्री में आते हैं।
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कुछ घोषणाओं से मिल सकता है फिल्म इंडस्ट्री को लाभ

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उल्लेखनीय है कि फिल्म निर्माण करने वाले स्टूडियो, देश भर के थियेटर मालिक, वितरक और ऑपरेटरों समेत कलाकारों को वित्त मंत्री से विभिन्न टैक्स मामलों में छूट की उम्मीद थी। फिल्म निर्माण से लेकर कलाकारों-तकनीशियनों की फीस पर टैक्स से लेकर शूटिंग के सामान के आयात पर निर्माताओं को टैक्स देना पड़ता है। देश भर में फिल्मों पर असमान और मनमाने टैक्स हैं। महाराष्ट्र में तो फिल्म के बजट का 61 फीसदी तक भी टैक्स में चला जाता है।

वित्त मंत्री ने कुछ ऐसी घोषणाएं की हैं जिनका अप्रत्यक्ष लाभ फिल्म इंडस्ट्री को मिल सकता है। इनमें कुछ खास देशों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वीजा ऑन अराइवल, गांवों में ब्राडबैंड विस्तार के लिए 500 करोड़ रुपये और कम्युनिटी रेडियो जैसी घोषणाएं शामिल हैं। टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए जेटली ने कुछ नहीं कहा। लेकिन उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए अलग से अरुण प्रभा टीवी चैनल लाने की घोषणा की। अभी इसका स्वरूप स्पष्ट नहीं है।

देश की सांस्कृतिक विरासत के रूप में नदियों के किनारे बसे घाटों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास के लिए वित्त मंत्री ने बजट में प्रावधान किया, परंतु सांस्कृतिक-सामाजिक इतिहास को सहेजने में उन्हें सिनेमा का योगदान याद नहीं रहा। मुंबई समेत देश में ऐसे सैकड़ों स्थल हैं जिनका सिनेमा के सौ साल के इतिहास में अहम योगदान है और उन्हें नष्ट होने से पहले सहेजे जाने की जरूरत है।

मोदी सरकार का महाराष्ट्र को रिटर्न गिफ्ट

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आगामी अक्टूबर महीने में संभावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने महाराष्ट्र को रिटर्न गिफ्ट देने की कोशिश की है। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने केंद्रीय बजट में महाराष्ट्र को सड़क, स्वास्थ्य, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, संरक्षण और कृषि उद्योग जैसे तोहफे दिये है। प्रवासियों की बढ़ती संख्या का हवाला देते हुए जेटली ने दिल्ली में पानी और बिजली के लिए 700 करोड़ रूपए का प्रस्ताव किया है लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को कुछ भी नहीं दिया।

मुंबई आर्थिक राजधानी होने के अलावा देश की सबसे बड़ी मेट्रो सिटी है। इसलिए वित्तमंत्री अरूण जेटली के बजट के पिटारे से मुंबई को बड़ी उमीदें थी। दिल्ली और महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं पर, मुंबई में पानी जैसी सुविधा पर वित्तमंत्री का ध्यान नहीं गया। हालांकि एफडीआई को बढ़ावा देने के मोदी सरकार के प्रस्ताव से उद्योगपतियों को जरूर लाभ की गुंजाईश है। इसके मद्देनजर एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार ने बजट प्रस्ताव को गडकरी और जेटली के विभाग का बजट कहते हुए तंज कसा है।

झुज्गी-झोपड़ी विकास का प्रस्ताव मुंबई के लिए सुकूनदायक है क्योंकि यह निर्णय मुंबई जैसे महानगर में झोपड़ों के विकास में सहायक होगा। नदीं जोड़ परियोजना के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रस्ताव महाराष्ट्र में पेयजल और खेती की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण साबित होगा। पुणे के एफटीआईआई संस्थान को राष्ट्रीय संस्थान का दर्जा, पुणे में जैव तकनीक आधारित क्लस्टर शुरु करने की घोषणा, आईआईएम और विदर्भ में एम्स अस्पताल खोलने के  प्रस्ताव को एक तरह से महाराष्ट्र के लिए रिटर्न गिफ्ट कहा जा रहा है। मोदी सरकार ने समुद्री किनारों पर बंदरगाहों के  विकास के लिए 11000 करोड़ रूपए का प्रस्ताव किया है जो कि महाराष्ट्र के लिए काफी हितकारी है।

राष्ट्रीय औद्योगिक कोरिडोर प्राधिकरण का मुख्यालय पुणे में बनाए जाने और मनरेगा को कृषि सेक्टर से जोड़ने का लाभ महाराष्ट्र को मिल सकेगा। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) सेज के विकास के साथ शिपिंग उद्योग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव काफी महत्वपूर्ण है। बजट प्रस्ताव के बारे में महाराष्ट्र चेंबर्स ऑफ कामर्स एंड एग्रीकल्चर के रामचंद्र भोगले कहते हैं कि आम बजट प्रस्ताव में टैक्सेशन है बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर देते हुए रोजगार सृजन पर ज्यादा ध्यान दिया है। ऐसे में यह कह सकते हैं कि जेटली ने महाराष्ट्र को चुनावी रोशनी से सराबोर करने का प्रयास किया है।

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