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गौमांस पर प्रतिबंध पर छिड़ी बहस, पढ़ें क्या बोला बॉलीवुड?

Wed, 04 Mar 2015 03:30 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 04 Mar 2015 03:30 PM IST
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film industry calls for 'freedom of choice' post beef ban

महाराष्ट्र में गौहत्या पर पूर्णतः प्रतिबंध लगने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। इस बहस में बॉलीवुड के कई सितारे भी कूद पड़े हैं जो एक-दूसरे की राय से जुदा नजर आए। कई सितारों ने तो गौहत्या पर प्रतिबंध का विरोध किया तो कुछ ने इसका समर्थन भी किया।

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सोमवार को लंबे अर्से बाद महाराष्ट्र सरकार ने गौहत्या पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है जिसे के लेकर फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी राय दी है।
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जानी मानी फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने इस पर कहा है कि बीफ खाने को लेकर वह मानती हैं कि इसे लेकर किसी पर जोर जबदस्ती नहीं किया जाना चाहिए। यह लोगों की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि उन्हें क्या खाना है?
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वहीं वीर दास ने कहा, 'सरकार ने 'बीफ' पर बैन तो लगा दिया लेकिन 'टीथ' पर बन कब लगाएगी। हम आराम से शाकाहारी जीवन जी सकते हैं लेकिन ऐसा करने से आपके विवाविद बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।'

गौहत्या पर प्रतिबंध के खिलाफ कूदे काटजू

film industry calls for 'freedom of choice' post beef ban

बॉलीवुड के दिग्गज उदय चोपड़ा ने गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने पर कहा है कि इसका सकारात्मक पहलू यह है कि अपने भोजन में मांसाहार कम करना अच्छी बात है लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह भी है कि हम फिर परंपरावादी समाज की ओर जा रहे हैं।

जबकि फिल्म निर्माता विशाल डडलानी ने कहा, 'मैं शाकाहारी हूं, इसलिए गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने से उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन ऐसे देश में जहां 30% से ज्यादा लोग बीफ खाते हों ऐसे में लोगों की चुनने की स्वतंत्रता जरूरी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन काटजू ने गौहत्या प्रतिबंध का घोर विरोध किया है। काटजू ने ट्वीट कर कहा है कि दुनिया के ज्यादातर लोग गौमांस खाते हैं तो वे अपराधी हैं?

19 साल के बाद गो हत्या पर लगा प्रतिबंध

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 19 साल के लंबे अंतराल के बाद गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिलने के बाद राज्य में गोहत्या पर पूर्णतया प्रतिबंध लग गया है। इसके साथ ही गोहत्या अपराध की श्रेणी में आ गया है। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब न सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई होगी बल्कि उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ेगी।

महाराष्ट्र में 1995 में पहली बार भाजपा-शिवसेना की सरकार बनने पर विधान मंडल के दोनों सदनों में गोवंश हत्या प्रतिबंध विधेयक पारित किया गया था। उसके बाद यह अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।

महाराष्ट्र में गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून की पुरजोर पैरवी करने वाले राज्य के वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने बताया कि भाजपा-शिवसेना सरकार में पारित किए गए इस विधेयक में कुछ खामियां थी, इसलिए केंद्र सरकार ने इसमें सुधार की सिफारिश की थी।

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