..तो नेताजी के बारे में कैप्टन अब्बास अली सही कहते थे
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद उनकी आजाद हिंद फौज में कैप्टन रहे स्वर्गीय अब्बास अली का वह दावा सत्यता के नजदीक पहुंच गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगस्त 1945 में नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में नहीं हुई थी।
अलीगढ़ के रहने वाले कैप्टन अब्बास अली का 2014 में देहांत हो चुका है। लेकिन जब तक जीवित रहे दावा करते रहे कि सितंबर 1945 में उन्होंने नेताजी को सिंगापुर के मेस में अपनी फौज को संबोधित करते देखा और सुना था। उस जोशीली तकरीर के शब्द अभी भी उनके दिमाग में ताजा हैं।
2014 में कई मौकों पर कैप्टन अब्बास अली ने ‘अमर उजाला’ से कहा था कि ‘नेताजी की मौत ताइवान के फारमोसा में हुए प्लेन क्रैश में हुई है यह वह नहीं मानते, क्योंकि उन्होंने अपनी नेताजी को देखा और सुना है’। कैप्टन अब्बास अली के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस के अचानक लापता होने का राज रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) की फाइलों में दफन है।
कैप्टन को अंग्रेजों ने सुनाई थी सजा-ए-मौत
यहां काबिले गौर है कि कैप्टन अपनी पूरी जिंदगी जिन बातों की ओर संकेत देते रहे पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी से जुड़ी जो 64 फाइलें सार्वजनिक की हैं वह उसी ओर इशारा करती हैं।
कैप्टन अब्बास अली के पुत्र कुरबान अली कहते हैं कि नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में नहीं हुई उस घटना के बाद भी वह देखे गए थे, यह बात कैप्टन साहब ने सबसे पहले बीबीसी पर एक साक्षात्कार में कही थी।
कैप्टन अब्बास अली का 95 वर्ष की आयु में सन 2014 में अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में देहांत हुआ था। मुल्तान में जब अंग्रेजों ने आईएनए के सैनिकों को समर्पण कराया था उसके बाद कैप्टन अब्बास अली को भी मौत की सजा सुनाई गई थी।
बाद में नेहरू और माउंटबेटन के बीच समझौता हुआ और भारत आजाद हुआ। इसके साथ कैप्टन अब्बास अली को भी मुल्तान के किले से रिहाई दे दी गई थी।