जो सीट दे रहे थे आडवाणी को, उसके लिए मांगे 1 करोड़!
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भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भले ही गांधीनगर का चुनाव कर लिया हो लेकिन भोपाल सीट पर घमासान मचा है। आडवाणी के नाम का प्रस्ताव करने वाले सांसद कैलाश जोशी पर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वे टिकट के बदले एक करोड़ रुपए मांग रहे थे।
कांग्रेस ने इस मामले में एक सीडी जारी की है, जिसमें कैलाश जोशी किसी से कह रहे हैं कि एक करोड़ रुपए दोगे क्या? कांग्रेस का आरोप है कि कैलाश जोशी एक करोड़ रुपए के बदले सीट खाली करने का सौदा कर रहे थे।
सीडी में यह दिखाया गया है कि कैलाश जोशी किसी से कह रहे हैं कि दूसरी सीटों के रेट और भी बढ़ गए हैं।
खटाई में कैलाश की दावेदारी
कैलाश जोशी ने कहा है कि वह किसी से मजाक कर रहे थे कि आपके पास एक करोड़ रुपए हो तो चुनाव लड़ लो।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कैलाश जोशी राजनीति के संत हैं और उन पर आरोप लगाकर कांग्रेस घृणित राजनीति कर रही है।
लालकृष्ण आडवाणी के गांधीनगर से चुनाव लड़ने के फैसले के बाद कैलाश जोशी एक बार फिर भोपाल सीट पर दावा करने लगे थे। अब इस सीडी प्रकरण के बाद कैलाश जोशी की दावेदारी खटाई में पड़ गई है।
बहू की दावेदारी ठोंक रहे गृहमंत्री
गृहमंत्री बाबूलाल गौर अपनी बहू कृष्णा गौर (भोपाल से महापौर) के लिए दावा ठोंक रहे थे। बल्कि उन्होंने दो दिन पहले तक आरोप लगाए कि स्थानीय कई नेता कृष्णा गौर को आगे नहीं बढ़ने देना चाहते।
बाबूलाल गौर अपनी बहू को टिकट दिलाने के लिए दिल्ली में भी परिक्रमा कर आए थे। अब वे कह रहे हैं कि सारा मामला संसदीय बोर्ड के पास है।
भाजपा के जिला अध्यक्ष आलोक शर्मा उम्मीदवारी की दौड़ में हैं।
शिवराज के करीबी भी सीट की दौड़ में
आलोक शर्मा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि बाबूलाल गौर खुद गृहमंत्री हैं और कृष्णा गौर महापौर हैं। दूसरे भी सभी प्रमुख नेताओं को विधानसभा में भेजा गया है या किसी निगम मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। आलोक शर्मा 25 वर्षों से लगातार संगठन का काम कर रहे हैं।
उनके आलोचकों की राय है कि आलोक शर्मा को 2008 में विधानसभा का टिकट मिला था और वे हार गए थे।
राज्यसभा में सदस्य अनिल दवे के समर्थक भी भोपाल लोकसभा के लिए उनका नाम चला रहे हैं। अब तक अनिल दवे की ओर से कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया है। भोपाल सीट को भाजपा की राजनीति में सुरक्षित सीट समझा जाता है, क्योंकि कांग्रेस यहां से कई हाईप्रोफाइल विकल्प अपना चुकी है और उसे अब तक कोई सफलता नहीं मिली।