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भ्रष्टाचार से लड़ने को योजना आयोग ने खोला मोर्चा

Sun, 03 Feb 2013 07:54 PM IST
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय Updated Sun, 03 Feb 2013 07:54 PM IST
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fight corruption by planning commission

देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में अब योजना आयोग ने भी मोर्चा खोल दिया है। योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के प्रारूप में ऐसे कई बदलाव की वकालत की है, जिससे मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जा सके।

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आयोग का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोप की जांच करने और दोषी को जल्द दंड देने के लिए एक सिस्टम की जरूरत है। आयोग ने मौजूदा व्यवस्था को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि जांच का मौजूदा तरीका काफी लंबा खिंचता है। मौजूदा प्रक्रिया में न्याय मिलने में देर होती है और यह भ्रष्टाचार को बढ़ाने में प्रेरक होता है।
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आयोग अपने दस्तावेज में यहीं नहीं रुका है। उसने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना करने को भी कहा है, जो ऐसे मामलों को शीघ्रता से निपटा सके। आयोग ने अपनी राय के समर्थन में सरकार द्वारा लाए जा रहे लोकपाल बिल का हवाला भी दिया है।
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भ्रष्टाचार से लड़ाई की इस मुहिम में योजना आयोग ने कई जगह सरकार का बचाव भी किया है, तो कई जगह अपने सुझाव भी सरकार के सामने रखे हैं। आयोग ने कहा है कि सरकार ने भी भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच के लिए लोकपाल संस्था के गठन के लिए बिल पेश किया है।

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों को सही ठहराने के लिए विश्व बैंक व ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सूचकांकों वाली हालिया रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है। योजना आयोग का कहना है कि इन दोनों एजेंसियों ने पिछले दशक के दौरान देश में भ्रष्टाचार के उच्च स्तर को दर्ज किया था, लेकिन मौजूदा दशक में इसका स्तर बढ़ा नहीं है। यह पिछले दशक के स्तर पर ही बना हुआ है।


इससे यह प्रतीत होता है कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ा नहीं है। हालांकि आयोग के इस तर्क से आलोचक इससे सहमत नहीं है। आलोचकों के मुताबिक दोनों ही एजेंसियों ने पिछले दशक में ही भ्रष्टाचार के सूचकांकों के पायदान पर भारत को काफी ऊंचा स्थान दिया था और यह स्तर घटा नहीं है बल्कि अभी भी बना हुआ है। यह जाहिर तौर पर दर्शाता है कि देश में भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर व्याप्त है।

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