शिवसेना बोली, जिसे दिक्कत हो वो सरकार छोड़ सकता है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के पुस्तक विमोचन से जुड़ा विवाद महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार पर असर डाल सकता है।
दोनों दलों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है लेकिन शिवसेना सरकार से अलग होने की स्थिति में नहीं है। मंगलवार को शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने कहा कि हम क्यों सरकार छोड़कर जाएं।
जिसे दिक्कत हो वह सरकार छोड़ सकता है। संकेत साफ है कि शिवसेना सरकार से अलग नहीं होगी बल्कि साथ रहकर भाजपा की फजीहत करेगी। कसूरी के बहाने दोनों सहयोगी दल आमने-सामने आ गए हैं।
कसूरी पर भाजपा-शिवसेना में मचा घमासान
दरअसल सुधींद्र कुलकर्णी को कालिख पोते जाने से दुखी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिवसेना ने शर्मसार कर दिया। इससे महाराष्ट्र की बदनामी हुई है।
इस पर संजय राउत ने उल्टा जवाब देते हुए कहा कि फडणवीस महाराष्ट्र को नहीं जानते हैं। उनके चलते राज्य और पुलिस की बदनामी हुई है।
ऐसी बयानबाजी भारी अंतर्कलह का संकेत है। इस घटनाक्रम पर उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं के साथ देर रात बैठक कर गंभीर मंत्रणा की थी। इसीलिए यह बात सामने आई कि शिवसेना के मंत्री सरकार से किसी भी समय इस्तीफा दे सकते हैं लेकिन इससे पार्टी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।
इसलिए राउत के बाद राज्य के पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने भी कहा कि फडणवीस सरकार को कोई खतरा नहीं है। सूत्रों का कहना है कि शिवसेना, भाजपा से नाराज होने के बावजूद सरकार में रहकर उसकी खिंचाई करने की रणनीति पर काम कर रही है। यह सिलसिला गुलाम अली के संगीत कार्यक्रम के विरोध से शुरू हुआ।
दबाव बनाने की रणनीति
शिवसेना का राष्ट्रवाद अचानक जाग्रत नहीं हुआ है। पार्टी की केंद्र में और मंत्री बनाने की मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है। महाराष्ट्र में भी पार्टी के मंत्रियों के पास मलाईदार विभाग नहीं हैं।
ऐसे में शिवसेना अपनी स्टाइल में अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रही है। मंगलवार को मुंबई से सटे कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका चुनाव में प्रत्याशियों के नामांकन की अंतिम तिथि थी लेकिन दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हो पाया।
शिवसेना इससे भी नाराज है। पार्टी ने हाल में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक के भूमिपूजन समारोह से अलग होकर भी अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी।