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IS के खिलाफ ‘संस्कार’ बनेगा पहला हथियार

Sun, 17 Jan 2016 06:13 AM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 06:13 AM IST
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fight against isis in india

अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएसआईएस के प्रभाव से देश के युवाओं को बचाने के लिए पारिवारिक संस्कार और भारतीय संस्कृति सरकार का सबसे बड़ा हथियार होगा। परिवारों की काउंसिलिंग और बातचीत के जरिए सौ से भी अधिक प्रभावित युवाओं को आईएसआईएस के चंगुल से बचाने की सफलता को देखते हुए गृह मंत्रालय और खुफिया विभाग ने इस मॉडल को और मजबूत करने का फैसला किया हैं।

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गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि हालांकि भारत में आईएसआईएस का प्रभाव अन्य देशों के मुकाबले कम है लेकिन इस खतरे के प्रति किसी भी तरह की कोताही बरतना घातक साबित हो सकता है।
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शनिवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुफिया एजेंसी आईबी और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के प्रमुखों समेत 13 राज्यों के पुलिस प्रतिनिधियों के साथ आईएसआईएस के खतरों पर लंबी बैठक की। बैठक में इंटरनेट और अन्य माध्यमों से युवाओं को बचाने के उपायों का शुरुआती खाका तैयार किया गया।
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राजनाथ ने कहा 'पारिवारिक संस्कार बड़ा हथियार'

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खास तौर पर दो दिन पहले मुसलमानों की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश इंडोनेशिया में आईएसआईएस के हमले के बाद  सरकार इसे बड़ी चुनौती के रुप में देख रही है। बैठक में उस खुफिया सूचना पर काफी गंभीर मंत्रणा हुई जिसमें बांग्लादेश समेत अन्य पड़ोसी देशों में आईएसआईएस की गहरी पैठ के बारे में विस्तार से बताया गया है।

सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह ने बैठक में कहा कि भारत के पारिवारिक संस्कार की परंपरा इस समस्या का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अब तक देश के 23 युवक आईएसआईएस के चंगुल में फंस कर उसके लिए काम कर रहे हैं। इसी क्रम में सीरिया और इराक में छह भारतीय युवकों की संगठन की तरफ से लड़ते हुए मौत भी हो गई है।

इनमें उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ समेत कर्नाटक और महाराष्ट्र के युवक शामिल हैं। लेकिन सरकार का मानना है कि इसके उलट सैकड़ों लड़कों को काउंसिलिंग के जरिये सिर्फ इसलिए बचाया जा सका क्योंकि उसके परिवार ने सुरक्षा एजेंसियों को अपने बच्चे में हो रहे संदिग्ध बदलाव के बारे में खबर कर दी।

आईबी ने तेरह राज्यों को किया आगाह

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आईबी ने 13 राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, केरल, असम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को खास तौर पर आईएसआईएस के प्रति आगाह किया है।

बैठक में एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, कश्मीर के अलगावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और देश के कई मुसलिम संगठनों की ओर से आतंकी संगठन आईएसआईएस की भर्त्सना की सराहना की गई। सुरक्षा एजेंसियां ओवैसी के इस संबंध में दिए गए एक बयान को काफी कारगर मानती हैं।

ओवैसी ने हैदराबाद में कहा था कि जिस युवक को आईएसआईएस में थोड़ा भी आकर्षण दिखता है उसे अपने परिवार और आसपास के मौलवी और उलेमा से राय लेनी चाहिए। ओवैसी और गिलानी ने कहा था कि आईएसआईएस का इस्लाम और उसकी शिक्षा के कोई लेना देना नहीं है।

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