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अभी भी पचास फीसदी आबादी को नहीं मिल रही बिजली

विजय गुप्ता/नई दिल्ली Updated Wed, 26 Dec 2012 08:08 AM IST
fifty percent of indian population live without electricity
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ग्रामीणों को पिछले पांच वर्षों के दौरान बिजली की सुविधा उपलब्ध करा पाने में नाकाम रही केंद्र सरकार को संसदीय समिति ने सख्त फटकार लगाई है। समिति ने कहा कि दूरस्थ गांवों और बस्तियों में प्रकाश की सुविधा उपलब्ध कराना सिर्फ उनका मूल अधिकार ही नहीं बल्कि सरकार का उत्तरदायित्व भी है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य में शामिल होने के बावजूद लगभग पचास फीसदी आबादी के बिजली से वंचित रह जाना सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य पूरा न कर पाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए, बारहवीं पंचवर्षीय के पहले चरण में पूरा करने का निर्देश दिया है। समिति के मुताबिक ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान दूरस्थ ग्राम विद्युतीकरण कार्यक्रम (आरवीईपी) के अंतर्गत मंत्रालय ने 9915 गांवों और बस्तियों को मंजूर किया था। लेकिन इसमें से सिर्फ 5947 गांवों और बस्तियां ही रोशन हो सकीं। यही नहीं, रोशन हुए गांवों और बस्तियों में ज्यादातर वे थे जिन्हें 10 वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य में शामिल किया गया था। यानि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य पचास फीसदी भी पूरा नहीं हुआ।

समिति के मुताबिक मंत्रालय की रिपोर्ट पर की जांच में पाया गया कि जिन गांवों और बस्तियों में बिजली पहुंचाने का दावा किया गया है उसमें 3968 गांव और बस्तियां ऐसे हैं जहां काम पूरा नहीं हुआ है। इस काम को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने मार्च 2012 की समय सीमा निर्धारित की थी। लेकिन इस अवधि में भी यह काम पूरा नहीं हो पाया है।

समिति का कहना है कि आरवीईपी के जरिए उन गांवों और बस्तियों में बिजली पहुंचाई जाती है जहां ग्रिड कनेक्शन व्यावहारिक नहीं है। लिहाजा ऐसे गांवों और बस्तियों को बिजली की सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की पहली प्राथमिकता है।

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