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बिहार में लालू की हवा या मोदी लहर?

Wed, 07 May 2014 08:21 PM IST
Updated Wed, 07 May 2014 08:21 PM IST
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fifth phase of loksabha elections in bihar on 7th may

लोकसभा चुनावों के आठवें चरण और बिहार में पांचवें चरण का मतदान आज हो रहा है। आठ जिलों में सात सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में कुल 118 उम्मीदवार हैं, इनमें 10 महिलाएं है।

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सारण, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, उजियारपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और महाराजगंज में होनेवाले मतदान में कई दिग्गजों का राजनीतिक करियर दांव पर है।

ऐसे में मतदाताओं की खामेशी से उम्मीदवारों की सांसें अटकी हुई हैं। स्थानीय मुद्दों को पिछले चरणों की तरह इस बार भी किसी उम्मीदवार ने प्रमुखता से नहीं उठाया है।
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राबड़ी-रूडी की जंग पर टिकी हैं सभी की निगाहें

fifth phase of loksabha elections in bihar on 7th may

भाजपा और उसके सहयोगी दलों को जहां नमो मंत्र पर भरोसा है, वहीं राजद अपने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को एक बार फिर जीत का मंत्र बता रहा है।

जदयू को नीतीश के काम और समर्थकों पर भरोसा है। इस चरण में सबसे बड़ा मुकाबला सारण का है।

यहां से बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने एक बार फिर यहां से राजीव प्रताप रूडी को टिकट दिया है। जदयू ने यहां से सलीम परवेज को मुकाबले में उतारा है।

राबड़ी के बहाने दांव पर लालू की प्रतिष्ठा

fifth phase of loksabha elections in bihar on 7th may

राबड़ी देवी विधानसभा में दो सीटों से लड़ने के बावजूद चुनाव हार गयी थीं। ऐसे में इस बार केवल लालू प्रसाद की इस सीट को बचाना ही नहीं है, बल्कि उनका राजनीतिक करियर भी दांव पर है।

कुछ ऐसी ही बात भाजपा उम्मीदवार राजीव प्रताप रूडी के साथ भी है। लालू से चुनाव हार चुके रूडी के बारे में कहा जाता है कि इस बार अगर नहीं जीतेंगे, तो कब जीतेंगे।

सामाजिक समीकरण और अपने नेतृत्व के जादुई करिश्मे के बल पर राबड़ी, रूडी और सलीम ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में कड़ी मेहनत की है।

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पासवान का राजनीतिक करियर भी दांव पर

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कुछ ऐसी ही स्थिति हाजीपुर की भी है। कभी रिकार्ड मतों से जीतने वाले रामविलास पासवान यहां जदयू के रामसुंदर दास को सीधी टक्कर दे रहे हैं।

पिछला चुनाव हार चुके पासवान के लिए यह सीट जीतना इस बार उनके राजनीतिक करियर के लिए जरूरी है। 93 साल के रामसुंदर दास का यह आखिरी चुनाव है।

कांग्रेस ने यहां से संजीव टोनी को उतारा है। गठबंधन बदलने के बाद जहां रामविलास की स्थिति बेहतर हुई है, वहीं टोनी मुकाबले को त्रिकोणीय करने में भी सफल होते नहीं दिख रहे हैं।

भाजपा के लिए नमो लहर ही एकमात्र आसरा

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उजियारपुर में जदयू की अश्वमेघ देवी का मुकाबला राजद के आलोक मेहता से है। भाजपा ने कुशवाहा बहुल उजियारपुर में इस बार यादव नित्यानंद राय को टिकट दिया है।

इस चुनाव में भाजपा का यह नया सामाजिक प्रयोग है। राय यहां के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में कड़ी मेहनत की है। इसी प्रकार सीतामढ़ी में जदयू के अर्जुन राय के तीर को राजद के सीताराम यादव भटका सकते हैं।

जेबी कृपलानी जैसे लोगों को जिताने वाली यहां की जनता ने केवल दो बार गैर यादव को यहां से संसद भेजा है। ऐसे में शर्मा के लिए नमो लहर ही जीत का एकमात्र आसरा है।

साबिर अली की बगावत की भी असर

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शिवहर सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और राजद के बीच ही है। भाजपा की रमा देवी को राजद के अनवारुल हक कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जदयू के साहिद अली खान ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में काफी मेहनत की है।

वैसे साबिर अली की बगावत के बाद जदयू यहां काफी कमजोर हो चुका है। बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद यहां मुकाबले को बहुकोणीय बनाने में सफल होती तो नहीं दिख रही हैं, लेकिन उनको मिलने वाले वोट परिणाम को जरूर प्रभावित कर सकते हैं।

जदयू के लिए सबसे मुश्किल दौर

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महाराजगंज में राजद उम्मीदवार प्रभुनाथ सिंह को भाजपा उम्मीदवार जनार्दन सिंह सिग्रिवाल और जदयू के धूमल सिंह से दोतरफा चुनौती मिल रही है।

राजपूत बहुल महाराजगंज में अब यादव वोट से परिणाम तय होते हैं, ऐसे में अगर राजपूत वोटों का विभाजन होता है, तो धूमल की राह आसान हो सकती है। मुजफ्फरपुर में भाजपा ने पूर्व सांसद जयनारायण निषाद के पुत्र अजय निषाद को टिकट दिया है।

जदयू ने यहां से बिजेंद्र चौधरी को उतारा है। कांग्रेस के अखिलेश सिंह इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की भरसक कोशिश की है। ऐसे में मतदाताओं की खामोशी ने नेताओं को ही नहीं, राजनीतिक विश्लेषकों को भी बेचैन कर रखा है।

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