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फिरोज जयंतीः कैसे थे राहुल गांधी के दादा?
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 12 Sep 2013 05:19 PM IST
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देश में गांधी परिवार का क्या ओहदा है, इससे हम सभी वाकिफ हैं। सोनिया गांधी के एक इशारे पर कांग्रेस और यूपीए की चाल सुधर जाती है, राहुल गांधी को लेकर पार्टी में गजब की दीवानगी है और प्रियंका सियासत से दूर रहने के बावजूद उतनी ही सुर्खियां बटोरती हैं।
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ये सभी जो विरासत संभाल रहे हैं, वे उन्हें गांधी परिवार के दिग्गजों से मिली हैं। इन्हीं दिग्गज में से एक थे राहुल गांधी के दादा और इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी।
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इस परिवार के दूसरे सदस्यों की तरह फिरोज जहांगीर गांधी की शख्सियत काफी दिलचस्प थी। आज उनकी 101वीं जयंती है।
बम्बई के एक पारसी परिवार में जन्मे फिरोज और इंदिरा की पहली मुलाकात कैसे हुई, यह घटना भी बड़ी दिलचस्प है।
1930 में कांग्रेसी स्वतंत्रता सेनानियों की इकाई वानर सेना बनाई गई। इविंग क्रिश्चियन कॉलेज के बाहर फिरोज की मुलाकात कमला नेहरू और इंदिरा से हुई, जो महिला प्रदर्शनकारियों में शामिल थीं।
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कैसे करीब आए फिरोज और इंदिरा?
कमला को गर्मी की वजह से चक्कर आ गए और फिरोज उन्हें संभालने के लिए दौड़े। अगले रोज उन्होंने पढ़ाई-लिखाई छोड़कर आजादी की लड़ाई में शामिल होने का फैसला किया।
उन्हें फैजाबाद जेल भेज दिया गया, जहां वह नौ महीने लाल बहादुर शास्त्री के साथ रहे। फिरोज ने 1933 में इंदिरा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इंदिरा और उनकी मां ने इनकार कर दिया, क्योंकि उस वक्त वह सिर्फ 16 साल की थीं।
धीरे-धीरे वह नेहरू परिवार, खास तौर से कमला नेहरू के करीब आते चले गए। उन्होंने कमला की स्थिति बिगड़ने पर यूरोप जाने में उनकी मदद की और लॉसाने में भी उनके साथ रहे।
कमला का जब देहांत हुआ, तो भी वह मौजूद थे। इंग्लैंड में इंदिरा और उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। आखिरकार, 1942 में उन दोनों की शादी हुई।
शादी के खिलाफ थे नेहरू
इंदिरा के पिता जवाहरलाल नेहरू इस शादी के खिलाफ थे और उन्होंने महात्मा गांधी से दोनों को ऐसा न करने के लिए मनाने को कहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
शादी को अभी छह महीने भी नहीं गुजरे थे कि अगस्त 1942 में उन दोनों को भारत छोड़ो आंदोलन की वजह से पकड़कर जेल भेज दिया गया। वे साल भर इलाहाबाद की नैनी सेंट्रल जेल में रहे।
हालांकि, आने वाले पांच साल सामान्य रहे। 1944 और 1946 में इंदिरा ने राजीव और संजय को जन्म दिया।
फिरोज न केवल स्वतंत्रता संग्राम और सियासत से जुड़े रहे, बल्कि उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी खूब हाथ दिखाए। उन्होंने लखनऊ से नेशनल हेराल्ड और नवजीवन जैसे अखबार प्रकाशित किए।
फिरोज को आए दो हार्ट अटैक
फिरोज को जब हार्ट अटैक आया, तो इंदिरा उनके साथ नहीं थीं। 1958 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास तीन मूर्ति भवन में अपने पिता के साथ रहने वाली इंदिरा उस वक्त भूटान के सरकारी दौरे पर थीं।
वह लौटने पर उनका ख्याल रखने के लिए कश्मीर गईं। लेकिन दो साल बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और इस बार संभल न सकी। फिरोज का निधन दिल्ली के विलिंगडन अस्पताल में 1960 में हुआ, जब उन्हें दूसरा हार्ट अटैक आया था।
जिस रायबरेली लोकसभा सीट से वे चुनकर संसद पहुंचते थे, उसी सीट को सोनिया गांधी ने संभाला। 2004 और 2009 को वह जीतकर सदन पहुंची। उत्तर प्रदेश की यह सीट कांग्रेस का किला मानी जाती है।