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आजम का ऐसा खौफ, किसी ने नहीं की मदद

Wed, 25 Mar 2015 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Wed, 25 Mar 2015 01:14 PM IST
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fear of azam in rampur.

कद्दावर मंत्री आजम खां के नाम से फेसबुक पर फर्जी भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में जब बरेली का छात्र गुलरेज जेल में था, तब 19 मार्च को उसके परिवार वाले उसकी जमानत कराने रामपुर पहुंचे। अदालत जाते समय टेंपो चालक से गुलरेज की जमानत के लिए किसी नामी वकील के बारे में पूछा तो आजम का जिक्र आते ही वह उन्हें रास्ते में ही टेंपो से उतार गया। परिवार वालों का आरोप है कि मंत्री से मामला जुड़ा होने पर रामपुर में कोई भी डर के मारे उनकी मदद करने को तैयार नहीं था। जिससे मदद मांगते वही किनारा कर लेता था।

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गुलरेज के पिता आवेज और ताऊ परवेज बताते हैं कि रामपुर में गुलरेज की जमानत कराने पहुंचने पर उन्हें बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ा। मामला मंत्री से जुड़ा होने का पता चलने पर कोई भी उनकी मदद करने को तैयार नहीं था। टेंपो वाले ने इसी कारण उन्हें रास्ते में उतार दिया।
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इसके बाद वह एक होटल में चाय पीने गए और यहां भी मदद के लिए जिक्र किया तो होटल वाले ने उनसे कहा कि भाई साहब जल्दी चाय पीओ और भले ही पैसा मत दो मगर जल्दी से चले जाओ। इस पर वह चुपचाप चाय की दुकान से उठकर चल दिए।

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कांग्रसियों को कहा शुक्रिया

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परवेज ने बताया कि यह सब झेलने के बाद उन्होंने कांग्रेसियों का सहारा लिया। कांग्रेस नेता नूर बानो और फैसल उनकी मदद को आए। कांग्रेस नेताओं ने गुलरेज की जमानत कराने में उनकी मदद की जिससे वह जेल की सलाखों के बाहर आ सका। इसके लिए कांग्रेसियों के हमेशा शुक्रगुजार रहेंगे।

धमकी मिलने पर अदालत से खिसक गया था जमानती

परवेज ने बताया कि अनजाने में मंत्री के नाम से फर्जी भड़काऊ पोस्ट करने के मामले में सत्ता पक्ष वालों ने न सिर्फ गुलरेज की जमानत कराने में अड़ंगा डाला, बल्कि जमानती तक को धमकाया गया। एक जमानती के फोन पर धमकी आई तो वह अदालत से ही डर कर चला गया था। बाद में उन्होंने बमुश्किल जमानती ढूंढा।

अल्लाह ने सुनी हमारी, अदालत से मिला इंसाफ
पिता आवेज खां कहते हैं कि बेटे के बेवजह पचड़े में फंस जाने से वह बेहद परेशान हो गए थे। बेटे को इस मुसीबत से बचाने के लिए वह हर दिन अल्लाह से दुआ मांगते थे। दिमागी उलझन में कामकाज भी ठप हो गया था। पूरा परिवार परेशान था और मंगलवार को जब आईटी एक्ट पर अदालत का फैसला आया तो सारी टेंशन दूर हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गुलरेज और उसके परिवार में जश्न

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यूपी सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खां के नाम से फेसबुक पर फर्जी भड़काऊ पोस्ट करने के आरोपी छात्र गुलरेज खां उर्फ विक्की और उसके परिवार ने आईटी एक्ट के अनुच्छेद 66-ए को असंवैधानिक करार दिए जाने पर राहत की सांस ली है। छात्र ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अदालत के इस फैसले से उसका कैरियर चौपट होने से बच गया। इसके चलते सजा का डर भी जाता रहा।

शहर के मलूकपुर जुग्गन वाली गली निवासी ग्यारहवीं के छात्र गुलरेज खां उर्फ विक्की ने फेसबुक एकाउंट पर कद्दावर मंत्री आजम खां के नाम से फर्जी भड़काऊ पोस्ट कर दिया था। इसको लेकर थाना गंज (रामपुर) में गुलरेज के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखा गया। चूंकि मामला सरकार के मंत्री से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने आनन-फानन में गुलरेज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दो दिन जेल में रहने के बाद 19 मार्च को रामपुर अदालत से उसको जमानत पर रिहा कर दिया गया। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66-ए को असंवैधानिक करार दे दिया। इसकी जानकारी मिलने पर गुलरेज और उसके परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा।

गुलरेज और उनका परिवार खुशियां बांटने शहर के एक होटल में पहुंच गया। यहां मीडिया कर्मियों का भी जमावड़ा लग गया। गुलरेज और उनके परिवार से इस केस के बारे में तमाम तरह के सवाल किए गए। उन्होंने तफसील से सबका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न सिर्फ गुलरेज बल्कि न जाने कितने और ऐसे बच्चे जिन्होंने धोखे से गलती की होगी, उन्हें राहत मिली है। इस फैसले से आईटी एक्ट में संभावित सजा के डर से तनाव में आए गुलरेज और उसके परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।

सजा के डर से आ गया था डिप्रेशन में

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आरोपी छात्र गुलरेज खां उर्फ विक्की ने बताया कि मुझसे अनजाने में भड़काऊ पोस्ट हो गया था। जेल जाने पर सबक मिला कि अब सोशल मीडिया पर दोस्तों को कोई भी पोस्ट शेयर करने से पहले भविष्य के बारे में सोचूंगा। आईटी एक्ट में सजा होने का डर हमेशा सताता रहता था और मैं डिप्रेशन में आ गया। पढ़ाई चौपट होने से भविष्य अंधेरा नजर आ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भविष्य बचा लिया। मैं सुप्रीम कोर्ट का शुक्रगुजार हूं। नादानी में किए गए इस कृत्य के लिए मेरे ऊपर सरकार के दबाव में और भी जो धाराएं लगी हैं, उनमें भी राहत मिलनी चाहिए।

जिंदगी में कभी न भुला पाएंगे वो दो रातें
छात्र की मां शबनम ने कहा कि मेरे बेटे से अगर अनजाने में गलती हो गई थी तो मंत्री जी उसे अपने पास बुलाकर दो थप्पड़ मारकर उसे माफ कर देते। इससे मुझे कतई अफसोस नहीं होता, लेकिन मासूम को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने वाले कृत्य से एक मां के दिल को ठेस पहुंचाई गई। बेटे ने जेल में जो दो रातें गुजारी वो हम पर कहर बनकर गुजरीं। इन रातों को कभी नहीं भुला पाएंगे और बच्चों को इनको सबक के रूप में लेकर बेवजह की बातों में पड़ने की बजाए पढ़ाई लिखाई में दिमाग लगाने के लिए कहूंगी।

घर में जश्न, मोहल्ले में मिठाइयां बंटी
आईटी एक्ट की धारा से राहत मिलने पर गुलरेज के घर में ही नहीं बल्कि पूरे मोहल्ले में खुशी का माहौल था। दिन भर मीडिया वालों का घर में जमावड़ा लगा रहा। छोटा भाई अदनान भी भाई को राहत मिलने पर उछल कूद रहा था। बहन अलसा ने सबसे पहले भाई गुलरेज को मिठाई खिलाई और फिर दूसरे लोगों का मुंह मीठा कराया। उनके घर दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। गुलरेज की मां ने कहा कि उनके बेटे से अनजाने में हुई गलती के बाद उन्होंने तमाम दुआएँ मांगी कि उनके बेटे को राहत मिले, उनकी दुआएं कबूल हुईं। अदालत से इंसाफ मिल गया है।

सुप्रीमकोर्ट के साथ-साथ श्रेया को दी बधाई

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आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बरेली के छात्र विक्की खां ने श्रेया सिंघल का शुक्रिया अदा किया है। श्रेया सिंघल ने ही महाराष्ट्र के पालघर में फेसबुक पर टिप्पणी करने के मामले में दो लड़कियों को गिरफ्तार करने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। विक्की का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ श्रेया भी बधाई की पात्र है।

विक्की को अभी हाल में रामपुर पुलिस ने फेसबुक पर नगर विकास मंत्री आजम खां के नाम पर फर्जी पोस्ट करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसे दो दिन के बाद कोर्ट से जमानत मिल गई थी। विक्की के खिलाफ मुकदमा नगर विकास मंत्री के मीडिया प्रभारी फसाहत खां शानू के दर्ज कराया था। पुलिस ने विक्की के खिलाफ आईटी की एक्ट की धारा 66 (ए), 153 (ए) आईपीसी की धारा 504 व 505 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विक्की की गिरफ्तारी के बाद 66 (ए) के दुरुपयोग का मामला फिर से गरम हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 66 (ए) को लेकर अपना फैसला दिया। फैसले पर जब विक्की की प्रतिक्रिया जानने के लिए उससे संपर्क किया तो उसने कहा कि जो फैसला आया है इसका क्रेडिट तो श्रेया सिंघल को जाता है। उसने ही 66 (ए) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। फिर से फेसबुक का इस्तेमाल करने के सवाल उसने कहा कि अभी तो नहीं, क्योंकि वह हाल के घटनाक्रम से मानसिक रूप से थोड़ा सा परेशान है।

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