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मुसलिमों पर बाध्यकारी नहीं है फतवा: विद्वान

Sun, 09 Dec 2012 09:06 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sun, 09 Dec 2012 09:06 PM IST
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fatwas are not necessarily binding on muslims says scholars

मुसलिम महिलाएं रिसेप्शनिस्ट का काम नहीं कर सकतीं, बांहों पर टैटू और अल्कोहल युक्त परफ्यूम का इस्तेमाल करने वाला नमाज अदा नहीं कर सकता संबंधी दारूल उलूम के हालिया फतवों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि मुसलिम विद्वानों का मानना है कि ऐसे फतवे सभी मुसलमानों पर बाध्यकारी नहीं हैं।

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ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि फतवे सभी के लिए अनिवार्य नहीं हो सकते हैं क्योंकि ये परिस्थितियों और संदर्भ के मुताबिक अलग-अलग लागू होते हैं। हालांकि सभी का मानना है कि सामान्य आस्था से संबंधित फतवे का हर एक मुसलिम को पालन करना चाहिए।
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जामिया मिलिया इस्लामिया के इस्लामिक स्टडीज विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अख्तरूल वासे के अनुसार हर एक फतवा सभी पर बाध्यकारी नहीं होता। आमतौर पर फतवा एक खास सवाल का जवाब होता है। इसलिए यहां पर उक्त सवाल के बारे में परिस्थिति और संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर हाल में मुसलिम महिलाओं का रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्य नहीं करने संबंधी फतवा हर किसी पर लागू नहीं हो सकता है।
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फतेहपुरी मसजिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद का कहना है कि फतवा को आदेश या निर्देश के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। यह एक इस्लामिक दृष्टिकोण है, जिसे लोग फॉलो कर सकते हैं। इस्लामिक कानून शरियत में जो कुछ कहा गया है उसका पालन करना हर मुसलिम का कर्तव्य है।


दैनिक आधार पर दारूल उलूम 30-40 फतवे जारी करता है। यहां तक ये ऑनलाइन भी जारी किए जाते हैं। विद्वानों का कहना है कि इसी तरह बरेली मकराज भी फतवा जारी करते हैं। दारूल उलूम द्वारा हाल ही में जारी किए गए कई फतवे चर्चा में रहे हैं।

इनमें शरीर पर टैटू गोदवाने वाला या फिर अल्कोहल युक्त परफ्यूम लगाकर नमाज अदा नहीं की जा सकती है संबंधी फतवा भी शामिल है।

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