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किडनी दान करना है हराम: दारुल उलूम
ब्यूरो/ अमर उजाला,देवबंद (सहारनपुर)
Updated Tue, 26 Aug 2014 01:26 PM IST
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किडनी दान करने संबंधी पूछे गए सवाल के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों ने इसे हराम करार दिया। कहा, इंसान जिस चीज का मालिक नहीं है वह उसे दान नहीं कर सकता है।
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मुफ्तियों से एक व्यक्ति ने सवाल संख्या 53737 में पूछा कि क्या कोई व्यक्ति निधन के बाद अपने शरीर की किडनी किसी दूसरे को बतौर दान दे सकता है। जिसके लिए उसने अपनी मृत्यु से पहले वसीयत की है।
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मुफ्तियों की खंडपीठ ने जवाब संख्या 53737 फतवा संख्या 1080-1058/एन=9/1435 में शरीयत का हवाला देते हुए कहा कि मनुष्य अपने शरीर या अंग का मालिक नहीं है।
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि शरीयत में साफ कहा गया है कि इंसान का शरीर अल्लाह की अमानत है।
इसलिए शरीर के किसी भी अंग को दान करने का हक किसी इंसान को नहीं है। वसीयत केवल ऐसी चीज की हो सकती है जिसका इंसान मालिक है। इसलिए जीवित रहते या मरने के बाद शरीर का कोई अंग किसी को बतौर दान देना कतई सही नहीं है बल्कि हराम है। यह तरीका मानव के खिलाफ है।
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