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कभी मांगती थी भीख, अब फोर्स की शान

Sun, 15 Jun 2014 08:28 AM IST
फहीम खान/अमर उजाला, आगरा
फहीम खान/अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 15 Jun 2014 08:28 AM IST
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fathers day special story

अल्लाह के रहमतों की बारिश कब और किस शक्ल में हो जाए, कोई नहीं जानता। मस्जिद के बाहर पाई-पाई के लिए हाथ फैलाने वाली परवीन और मुफलिसी में जी रही शमीमा अख्तर भी नहीं जानती थीं।

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फरिश्ते के रूप में आए एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने न सिर्फ पिता का साया दिया बल्कि वहां ला खड़ा किया जिस मुकाम का सपना तक देखने की उनमें हिम्मत न थी।

आज अगर अल्लाह की इबादत में दोनों के हाथ उठते हैं तो वे सबसे पहले इस पिता के लिए दुआ मांगती हैं।

सीआईएसएफ में कांस्टेबल हैं परवीन

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कश्मीर की बांदीपुरा निवासी परवीन बानो आज सीआईएसएफ में कांस्टेबल हैं। फादर्स डे का दिन उनकी जिंदगी में कुछ ज्यादा ही महत्व रखता है। परवीन को मां के साथ मस्जिद के सामने भीख मांगते देख लेफ्टिनेंट कर्नल जीएम खान ने उन्हें काम करने की नसीहत दी।

नौवीं छात्रा परवीन की पढ़ाई के लिए ले. कर्नल खान ने सभी संसाधन मुहैया कराए। हाईस्कूल के बाद सीआईएसएफ में नियुक्ति के लिए फिजिकल ट्रेनिंग किट दिलाई। कश्मीर में युवतियों का फोर्स में जाना मना है लेकिन परवीन की आंखों में सपने थे। माइनस तापमान में भी वह फजर की नमाज के वक्त पहाड़ों पर दौड़ने जाती।

शारीरिक के बाद लिखित परीक्षा में भी पास हुई और अब मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात है। परवीन का कहना है कि ‘पिता’ ने ही सपनों को सच करने का रास्ता दिखाया। 

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फाकाकशी से संगीत के आकाश तक पहुंची शमीमा

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संगीत की दुनिया में मुकाम बना रही शमीमा अख्तर के लिए भी ले. कर्नल जीएम खान ‘वालिद’ हैं। कश्मीर की ही शमीमा का परिवार भी फाकाकशी बस जैसे तैसे दिन काट रहा था। सेना के लिए सद्भावना कार्यक्रम चलाने वाले ले. क र्नल खान ने 2011 में क्या मिले उनकी जिंदगी बदल गई।

शमीमा को उन्होंने अपने माता-पिता के पास आगरा भेजा। पढ़ाई के साथ संगीत की ट्रेनिंग दिलाई। भातखंडे संगीत संस्थान में प्रवेश दिलाया। अब शमीमा के दो एलबम आ चुके हैं। ‘आपके करीब’ में छह गाने हैं, तीन हिंदी और तीन कश्मीरी। ‘बादियों में’ आठ गाने हैं, छह हिंदी और दो पंजाबी। दूरदर्शन के ‘मिले सुर’ प्रतियोगिता में फाइनल में पहुंच गई हैं। बोलीं, ‘मैं हमेशा से अल्लाह से दुआ करती हूं कि मेरे जैसा वालिद हर किसी को दे। आज जो कुछ भी हूं उन्हीं बदौलत हूं।’

ले. कर्नल जीएम खान का कहना है कि इन बच्चियों को कुछ करने की चाह थी, तो इनको बस रास्ता दिखाया। दोनों अब मेरी बेटियां हैं। हमारे परिवार का हिस्सा हैं। इनकी कामयाबी मुझे सुकून देती है।

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