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उफ! चार बेटियों को जहर देकर मार डाला
आजमगढ़/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 10 Dec 2012 09:11 AM IST
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इसे गरीबी का दंश झेल रहे एक पिता की बेबसी कहें या बेटी की ज़ात से नफरत करने वाले समाज के नरपिचास की क्रूरता, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
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यह घटना आजमगढ़ के निजामाबाद की है, जहां चार बेटियों को एक साथ जहर देकर मार डाला गया। बेटियों को मौत की नींद सुलाने वाला और कोई नहीं बल्कि उनको जन्म देने वाला उनका पिता ही है।
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निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकवारी उर्फ चकिया गांव निवासी वीरेंद्र गौड़ ठेला आदि चलाकर परिवार का भरण पोषण करता है। उसके परिवार में पत्नी हौसिला के अलावा सात संतानें थीं। बड़ी पुत्री बेबी की शादी हो चुकी है। सन्नो (16), जुड़वां रन्नो-मन्नो (11), सुनीता (8), उजाला (5) और डेढ़ वर्षीय पुत्र सत्यशील साथ रहते थे।
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बताया जाता है कि शनिवार शाम 7.45 बजे वीरेंद्र ने रन्नो-मन्नो, सुनीता व उजाला को जहर मिला चावल-दाल खिला दिया। देर रात चारों बच्चियों के दम तोड़ने के बाद उसने गांव के किसी व्यक्ति को सूचना दिए बगैर सभी की लाशों को नदी के पास ले गया और ठिकाने लगा दिया। इतना ही नहीं, बचा हुआ जहरीला भोजन खाकर एक कुत्ता भी मर गया। उसे भी उसने गायब कर दिया।
रविवार सुबह गांव में चर्चा हुई तो बात पुलिस तक पहुंची। क्षेत्राधिकारी पहुंचे तो पूछताछ में वीरेंद्र ने लाशों को जलाने की बात कही। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर देखा तो वहां जलाने के कोई सबूत नहीं मिले। पुलिस ने नदी में लाशों को बहाने की आशंका पर गोताखोरों से तलाश करवाई, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। इस बीच शाम को पुलिस ने गांव के चौकीदार रामअधार यादव की तहरीर पर माता-पिता के खिलाफ चारों बेटिंयों की हत्याकर लाश गायब करने का केस दर्ज किया।
समाज में इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि विज्ञान से खलिहान तक हम भले ही तरक्की के नये-नये आयाम कायम कर लिये हों, पर आज भी समाज के किसी कोने से घटी घटनाएं हमारे सभ्य होने और तरक्की के दावे को पलभर में झूठला देती हैं।
आखिर बेटियों से इतनी नफरत क्यों...? इस बारे में आप क्या सोचते है?