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बेरहम बना डॉक्टर बाप, बेटे को महीनों कैद कर बनाया 'मरीज'

Fri, 20 Feb 2015 12:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसागंज
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसागंज Updated Fri, 20 Feb 2015 12:07 PM IST
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father kept his son in captivity.

मां की मौत से डिप्रेशन में आए बेटे का इलाज कराने की बजाए पिता ने उसे मकान में कैद कर दिया। पेशे से डाक्टर होने के बाद भी पिता बेटे की बेबसी का दर्द समझने की बजाए उसे मकान में कैद करके फीरोजाबाद आकर रहने लगा।

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इलाके के लोगों की नजर बंद मकान में छत पर नग्नावस्था में खडे़ युवक पर गई तो हैरान रह गए। लोगों ने पुलिस प्रशासन को सूचना दी। एसडीएम मौके पर पहुंचे और मकान से उसे मुक्त कराया।
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यूपी के सिरसागंज में डाक्टर सुभाष क्लीनिक चलाते थे। 12 साल पहले पत्नी की कैंसर से मौत हो गई थी। मां की मौत से बेटा नवीन सदमे में आ गया। इससे पहले वह ठीक था और कसबा के ही एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ता था।
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चार माह पहले डा. सुभाष फीरोजाबाद में कोटला चुंगी के निकट आकर रहने लगे। हर गुरुवार को वह सिरसागंज स्थित अपने आवास पर जाते थे। मोहल्ले के लोग जब भी डाक्टर सुभाष से उसके बेटे के बारे में पूछते तो वह कह देते कि वह उनके साथ रह रहा है।

नग्न टहलते देख चौंक गए लोग

father kept his son in captivity.

बुधवार को लोगों ने नवीन को मकान की ऊपर की मंजिल पर नग्न देखा तो लोग दंग रह गए। गुरुवार के इंतजार में लोगों ने कोई एक्शन नहीं लिया। गुरुवार दोपहर को जैसे ही डाक्टर मकान पर पहुंचे लोगों ने नवीन के बारे में पूछा। डाक्टर ने हमेशा की तरह कह दिया फीरोजाबाद में है।

इस पर लोगों की डाक्टर से बहस हो गई वह उनके घर में जबरन घुसने लगे तो डाक्टर ने विरोध किया। लोगों ने डाक्टर को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर एसडीएम रवींद्र कुमार पहुंच गए। उन्होंने मकान के अंदर से नवीन को मुक्त कराया। घर में न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही पानी का। यही नहीं घर में बिछाने के लिए बिस्तर और रजाई तक नहीं थी।

नवीन की दशा ऐसी थी कि देखने वाले भी चौंक गए। एसडीएम रवींद्र  कुमार ने नवीन को एंबुलेंस से इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। लोगों ने एसडीएम को बताया कि डाक्टर का छोटा बेटा निखिल छह साल पहले ही बाहर चला गया था। डाक्टर एक नर्स के साथ फीरोजाबाद शहर में जाकर रहने लगे थे।

लोगों की आंखें भर आईं
बिना बिजली के बंद मकान में नवीन के लिए दिन और रात एक समान थे लेकिन इसके बाद भी कई पुरानी बातें नवीन को तारीख सहित याद थीं। उपजिलाधिकारी से भी काफी देर तक नवीन से बातचीत की लेकिन नवीन की दशा देखकर उनके साथ वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।

एसडीएम का कहना है कि पिता ने अपने बेटे नवीन को मकान में बंद कर रखा था। उसका इलाज अब आगरा में कराया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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