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महिला जज यौन उत्पीड़न मामले में नहीं होगी जल्द सुनवाई

Wed, 06 Aug 2014 09:39 AM IST
Updated Wed, 06 Aug 2014 09:39 AM IST
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Fast trail can't be possible in female judge harassment case

जनहित याचिका में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला जज की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और इसकी न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

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जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता एमएल शर्मा ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर पीठ ने कहा कि चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ही इस मामले को सूचीबद्ध करेगी।
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यदि वह याचिका पर जल्द सुनवाई चाहते हैं तो चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष गुजारिश करें। यह पीठ इस याचिका के सूचीबद्ध होने की स्थिति में ही सुनवाई कर सकती है।
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मनोहर लाल शर्मा ने दायर की थी याच‌िका

Fast trail can't be possible in female judge harassment case

मालूम हो कि इस महिला जज ने अपनी शिकायत में कहा है कि यौन उत्पीड़न के कारण ही उसे न्यायिक सेवा से इस्तीफा देना पड़ा। याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है।

याचिका में इस मामले की जांच के दौरान हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस न्यायाधीश के निलंबन का भी अनुरोध किया गया है जिसने कथित रूप से महिला जज का यौन उत्पीड़न किया।

याचिका में इन आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत से अपने ही न्यायाधीशों की सदस्यता वाला जांच आयोग गठित करने और विशाखा प्रकरण में दिए गए निर्देशों के दायरे में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।

'जज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी'

Fast trail can't be possible in female judge harassment case

याचिका में इन आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत से अपने ही न्यायाधीशों की सदस्यता वाला जांच आयोग गठित करने और विशाखा प्रकरण में दिए गए निर्देशों के दायरे में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि यौन उत्पीड़न के आरोपों का हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने खंडन करते हुए कहा है कि अगर आरोप सही हों तो उन्हें मौत की सजा दी जाए। यह मामला मंगलवार को लोकसभा में उठाया गया और इसकी कड़ी निंदा की गई।

भाजपा की मीक्षाक्षी लेखी ने सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि इस शर्मनाक कृत्य की सभी को निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों और कचहरियों का लाभ लोगों को कैसे मिल पाएगा जब वहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा महिला जज की शिकायत की निष्पक्षता से जांच की जानी चाहिए और यदि आरोप सिद्ध होता है तो संबंधित जज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

यदि इस घटना में कुछ भी सच्चाई है तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दु:खद है। मुझे उम्मीद है कि आरोपों में सच्चाई होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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