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मुफ्ती की बेटी से पहले आतंकियों के निशाने पर थीं फारूक की बेटी

Sun, 05 Jul 2015 09:12 AM IST
Updated Sun, 05 Jul 2015 09:12 AM IST
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Farooq Abdullah daughter Safia was the first target of terrorists

1989 में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के आतंकियों के निशाने पर जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद से पहले राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बड़ी बेटी साफिया अब्दुल्ला थीं।

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लेकिन कड़ी सुरक्षा के चलते साफिया के अपहरण की कोशिशें नाकाम रहीं।

1989 में घाटी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए आतुर आतंकियों ने साफिया के बाद श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अल्लाह बख्श की बेटी को अगवा करने की साजिश रची। इसी दौरान आतंकियों का ध्यान तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया की तरफ गया।

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साफिया अब्दुल्ला की कड़ी सुरक्षा की वजह से नाकाम रहे आतंकी

Farooq Abdullah daughter Safia was the first target of terrorists

खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख ए एस दुलत ने अपनी नई किताब में इसका खुलासा किया है। दुलत के मुताबिक, रूबिया मेडिकल इंटर्न थीं और रोजाना अस्पताल जाने के रुटीन ने उन्हें आतंकियों का आसान लक्ष्य बना दिया था।

उन्होंने लिखा है कि पांच दिसंबर 1989 को जब मुफ्ती वीपी सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद की शपथ ले रहे थे तब जेकेएलएफ के दिमाग में उनकी बेटी के अपहरण का ख्याल कौंधा।

उस दौरान आतंकी साफिया के अपहरण की कोशिश छोड़ एसएसपी अल्लाह बख्श की बेटी के अपहरण की कोशिशों में लगे थे। रूबिया का नाम आते ही आतंकी उनके श्रीनगर के लाल डेड अस्पताल आने जाने पर नजर रखने लगे।

दो दिन बाद आठ दिसंबर 1989 को रूबिया को उनके घर से करीब आधे किलोमीटर दूर से अगवा कर आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का नया अध्याय शुरू कर दिया।

तत्कालीन एसएसपी अल्लाह बख्श की बेटी के अपहरण की भी थी साजिश

Farooq Abdullah daughter Safia was the first target of terrorists

दुलत के मुताबिक, आतंकी अल्लाह बख्श के पीछे लंबे समय से लगे थे। बख्श को नेशनल कांफ्रेस व कांग्रेस की मिलीजुली सरकार का खास माना जाता था। एसएसपी पर 1987 के चुनाव में धांधली का आरोप भी लगा था।

गौरतलब है कि इस चुनाव में हुई बड़ी धांधली की अंतरराष्ट्रीय मंच पर शिकायत के बाद ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने घाटी में अलगाववादियों और आतंकियों को भड़काना शुरू कर दिया था। रूबिया की रिहाई के बदले सरकार का आतंकियों को रिहा करना ऐतिहासिक भूल माना जाता है।

दुलत ने लिखा है कि फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री के तौर पर आतंकियों को रिहा करने के विरोध में थे। अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से कहा था कि अगर जेल में बंद जेकेएलएफ आतंकियों को रिहा नहीं भी किया जाता तो भी आतंकी रूबिया को सही सलामत छोड़ देंगे।

फारूक की दलील थी कि घाटी में रूबिया के प्रति सहानुभूति की वजह से आतंकी उसे मारने का जोखिम नहीं उठाएंगे। दुलत की किताब के खुलासे के बाद अब सवाल यह उठने लगा है कि अगर वही आतंकी साफिया का अपहरण करने में कामयाब हो जाते तो भी फारूक अब्दुल्ला केंद्र को यही सलाह देते।

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