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एमएसपी बढ़ाए जाने के बाद भी खुश नहीं किसान

Wed, 24 Jun 2015 02:11 AM IST
Updated Wed, 24 Jun 2015 02:11 AM IST
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Farmers not happy after MSP hike

खरीफ फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाए जाने के बावजूद भी किसानों के मुद्दे पर संघ के अनुसांगिक संगठन मोदी सरकार से संतुष्ट नहीं हैं।

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सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रभाकर केलकर ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)के बजाए किसानों को लागत मूल्य पर मुनाफा देने की मांग की है। अमर उजाला से बातचीत में केलकर ने कहा कि एमएसपी बढ़ाए जाने के बावजूद भी किसानों में उत्साह नहीं है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने बोनस समेत दलहन की एमएसपी 275रू. प्रति क्विंटल तो बढ़ा दी है। लेकिन दलहन की सरकारी खरीद की व्यवस्था न होने के कारण यह घोषणा सवाल खड़े कर रही है। साथ ही बोनस का भुगतान किस तरह किया जाएगा। इसको लेकर भी स्पष्टता नहीं है।
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छवि बदलने में सरकार को नहीं मिल रही सफलता

Farmers not happy after MSP hike

वहीं भारतीय किसान संघ की ओर से हो रही आलोचनाओं ने सरकार की पेरशानी और बढ़ा दी है। भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों के बीच अपनी चमक खो चुकी मोदी सरकार पर पहले से ही दबाव है।

मगर छवि बदलने के प्रयास में उसके अपने ही रोड़ा बन रहे हैं। सरकार को किसानों के बीच अभी सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। इस कवायद में सरकार ने बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान पर दरियादिली दिखाने के बाद खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करते समय दलहन पर बोनस तक देने का निर्णय लिया है। लेकिन सरकार के अपने ही भारतीय किसान संघ ने इस फैसले पर सवाल उठा दिए हैं।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि एमएसपी बढ़ाए जाने के फैसले से सभी किसान खुश नहीं है। इसलिए सरकार को लाभकरी मूल्य प्रदान करना चाहिए। प्रभाकर केलकर ने कहा है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग में किसानों के पक्ष को वरियता मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग किया है कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने की व्यवस्था हो।

जिससे किसानों को उपज का फायदा मिल सके। सनद रहे कि लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी संबोधनों में किसानों को उनके फसल का लागत मूल्य देने का वायदा किया था। मगर केंद्र में सरकार बनने के बाद भी पुराने एमएसपी प्रणाली को ही आगे बढ़ाया जा रहा है।

किया गया हमदर्दी दिखाने का प्रयास

Farmers not happy after MSP hike

हालांकि सरकार की ओर से अपने स्तर पर किसानों को साधने का प्रयास लगातार जारी है। भूमि अधिग्रहण से नाराज किसानों को अपनी ओर लाने के कवायद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर वित्त मंत्री अरूण जेटली ने किसी न किसी बहाने उनसे मिलकर हमदर्दी दिखाने का प्रयास किया है।

गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए केंद्र सरकार के जरिए चीनी मिलों को 6000करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण दिए जाने के बाद बीते दिनों कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान के नेतृत्व में किसानों ने पीएम मोदी से मुलाकात की।

तो भूमि अधिग्रहण के पेंच को सुलझाने के लिए किसान नेताओं के साथ वित्त मंत्री जेटली कई दौर कि बैठकें कर चुके हैं। सरकार ने बेमौसमी बारिश से हुए फसल के नुकसान पर तमाम उदारता दिखाने के साथ चीनी मिलों को भी घाटे से उबारने के प्रयास किये हैं। मगर सफलता अब तक उसके हाथ मिलती नहीं दिख रही है। भूमि अधिग्रहण पर संसदीय समिति के सामने भी संघ के तमाम संगठनों ने अपने पुराने मांगों को दोबारा से दोहराया है।

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