फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

एक और 'गजेंद्र', टावर से कूदकर किसान ने दी जान

Sat, 25 Apr 2015 02:46 PM IST
Updated Sat, 25 Apr 2015 02:46 PM IST
विज्ञापन
farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

फसल बर्बाद होने और कर्ज के बोझ से दबे खरखौदा क्षेत्र के किसान ने शुक्रवार को मोबाइल टावर से कूदकर खुदकुशी कर ली। करीब सवा चार घंटे तक किसान टावर पर रहा, मगर मौके पर मौजूद पुलिस और नायब तहसीलदार तमाशबीन बने रहे।

विज्ञापन


इस दौरान वह लगातार फसल के नुकसान पर मुआवजे की मांग करता रहा, लेकिन उसकी बात सुनने कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसान की मौत के बाद भड़के लोगों ने अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बंधक भी बना लिया।
विज्ञापन


खरखौदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर धनतला निवासी योगेंद्र पुत्र लीलू (38) पुत्र हरीश चंद्र के पास सात बीघा जमीन है। पहले वह शाहदरा स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। तीन साल पहले जॉब छूट गई। इसके बाद गांव में आकर परिवार पालने के लिए खेती करने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कभी मौसम तो कभी अन्य कारण से खेती में लगातार घाटा हुआ, तो उसने कर्ज लेना शुरू कर दिया। इस बीच उस पर साहूकारों के पांच लाख कर्ज हो गए। इसकी वजह से मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर लगभग 11 बजे वह खेत पर पहुंचा तो गेहूं की बर्बाद फसल देखकर व्यथित हो गया।

बात नहीं सुनी, टावर पर ही पीया पानी

farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

इसके बाद वह अनमने मन से खेत से चला तो लगभग 11:30 बजे गांव के ही दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर के पास रुक गया। कुछ क्षण खड़े-खड़े सोचता रहा और फिर बाउंड्री फांदकर अंदर घुसा और टावर पर चढ़ने लगा। ऐसा करते देख गांव के ही राजकुमार ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना।

योगेंद्र के टावर पर चढ़ने की सूचना राजकुमार ने ही पुलिस कंट्रोल रूम और गांव वालों को दी। इस पर लगभग  40 मिनट बाद खरखौदा थाने से एक दरोगा और तीन सिपाही पहुंचे। ग्रामीणों के साथ योगेंद्र की पत्नी कृष्णा और अन्य परिजन भी पहुंच गए।

ग्रामीण और परिजन उससे नीचे उतरने की गुजारिश करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस पर योगेंद्र के भतीजा शैंकी के अलावा महावीर सिंह और ओमेंद्र टावर पर चढ़े और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने नीचे उतरने से साफ मना कर दिया। हां, शैंकी से मंगाकर टावर पर ही पानी जरूर पीया।

अफसर कार से न उतरे, फायर ब्रिगेड की सीढ़ी पड़ी छोटी

farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

सारा घटनाक्रम पुलिस की आंखों के सामने चलता रहा। लगभग एक बजे नायब तहसीलदार (तृतीय) जयेंद्र सिंह पहुंचे, लेकिन वह अपनी कार से नहीं उतरे। फायर स्टेशन ऑफिसर संतोष राय टीम के साथ पहुंचे तो सीढ़ी छोटी पड़ गई। इस पर टावर पर चढ़ने में मजबूरी जता दी। लंबी सीढ़ी मंगाने के लिए दमकल वाहन भी लौटा दिया। वहीं टावर गार्ड सुरक्षा की टीम भी कुछ नहीं कर सकी।

...और 120 फीट ऊंचे टावर से कूद गया
योगेंद्र लगभग 11:30 बजे 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा। इस दौरान वह बार-बार बर्बाद फसल का मुआवजा मांगता रहा। सारा घटनाक्रम पुलिस वालों के अलावा नायब तहसीलदार आदि के सामने होता रहा, लेकिन उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

कोई सक्षम अधिकारी भी उसकी बात सुनने नहीं पहुंचा। न ही उसे उतारने के लिए कोई ठोस प्रयास किया गया। इस पर लगभग 3:40 बजे योगेंद्र ने टावर से छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही दम तोड़ दिया।

‘मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो’

farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

दयाराम की जमीन पर लगे मोबाइल कंपनी के टावर पर योगेंद्र को चढ़ते देख गांव के ही राजकुमार भड़ाना ने उसे रोका। कारण भी पूछा। इस पर योगेंद्र ने जवाब दिया कि सब बर्बाद हो गया है, अब कुछ नहीं बचा, तुम टेंशन मत लो, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

अफसरों और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
किसान योगेंद्र की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एफएसओ (फायर सर्विस ऑफिसर) को बंधक भी बना लिया। जमकर हंगामा हुआ। फिर करीब साढ़े चार बजे एसओ खरखौदा और पांच बजे एसपी क्राइम, एसडीएम रवीश गुप्ता फोर्स के साथ पहुंचे। एडीएम (प्रशासन) एके उपाध्याय भी पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।

दो लाख की आर्थिक सहायता की घोषणा

farmer was suicide jumping out on 120 mtr mobile tower

अफसरों से ग्रामीणों ने कहा कि योगेंद्र ने फसल बर्बाद होने और कर्ज में डूबने के कारण आत्महत्या की है। उसके परिवार को आर्थिक सहायता दिलाई जाए। इस पर एडीएम (प्रशासन) ने शासन स्तर पर बात की। इसके बताया कि पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की स्वीकृति मिल गई है।

हालांकि ग्रामीणों की मांग के बाद कहा कि पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलाने की संस्तुति भेजेंगे। कृषक दुर्घटना बीमा के पांच लाख और अन्य मदों से भी आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। इस पर लगभग तीन घंटे बाद ग्रामीणों ने योगेंद्र का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने को उठाने दिया।

परिवार की स्थिति
रसूलपुर धनतला निवासी हरीश चंद के तीन बेटों में योगेंद्र उर्फ लीलू सबसे छोटा था। उसके दो बड़े भाई करन सिंह और गजेंद्र हैं। परिवार में योगेंद्र की पत्नी कृष्णा, बेटी दीपा (12) और निक्की (10) तथा बेटा सचिन (16) हैं। योगेंद्र की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी रोते-रोते बेहोश हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed