फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   farmer use liqour for cultivation of vegetable

जुगाड़: देसी शराब के छिड़काव से पैदा की जा रही ज्यादा सब्जी

Tue, 28 Jul 2015 11:38 AM IST
Updated Tue, 28 Jul 2015 11:38 AM IST
विज्ञापन
farmer use liqour for cultivation of vegetable

शराब देसी हो या विदेशी, सेहत के लिए तो हानिकारक ही है। लेकिन, सब्जियों की बात करें तो देसी शराब की फुहार से ही इसकी सेहत संवर जाती है। पौधा हरा-भरा और पुष्ट होने के साथ पैदावार भी अधिक देता है। यह किसी वैज्ञानिक शोध का नतीजा नहीं, बल्कि मेरठ के किसानों का ईजाद किया नया नुस्खा है।

विज्ञापन


किसानों का दावा है कि यह महंगी कीटनाशक दवाओं से सस्ता भी है और कारगर भी। कृषि वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि शराब या अल्कोहल सब्जियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खत्म कर देता है। हालांकि, इस पर कोई शोध नहीं हुआ है। ऐसे में वे आधिकारिक तौर पर फसलों पर इसके छिड़काव की अनुमति नहीं दे सकते।
विज्ञापन


वेस्ट यूपी के किसान कृषि उपज बढ़ाने के लिए फसलों पर कुछ न कुछ नुस्खे आजमाने के लिए मशहूर हैं। कोई अपनी विधि से खेती कर अधिक पैदावार ले रहा है तो कोई सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अपने नुस्खे अपना रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कृषि और उद्यान विभाग द्वारा लगाए जाने वाले मेलों और गोष्ठियों में भी इस तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मेरठ के किसानों ने मिर्च, लौकी, तुरई, बैंगन समेत अन्य हरी सब्जियों पर कीटनाशक की जगह देसी शराब का छिड़काव शुरू कर दिया है। दावा है कि इससे पौधे सेहतमंद होने के साथ उत्पादन भी अधिक दे रहे हैं।

किसानों का दावा
देसी शराब के छिड़काव के तीसरे दिन ही सब्जियों के पौधों से पीलापन दूर होने लगता है। उसकी बढ़वार भी शुरू हो जाती है। पौधों पर मंडराने वाले कीट या अन्य बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। फल बनने से पहले फूल सूखने की समस्या भी समाप्त हो जाती है। नए फूल और फल लगने लगते हैं।

इस तरह इस्तेमाल
किसानों के मुताबिक, 11 लीटर की टंकी वाली स्प्रे मशीन में 25 एमएल देसी शराब को मिलाकर सब्जी के खेत में छिड़काव किया जाता है। एक बीघे में तीन टंकी का छिड़काव होता है। इस तरह प्रति बीघा 75 एमएल देसी शराब का इस्तेमाल किया जाता है।

फसलों पर नुकसान नहीं

farmer use liqour for cultivation of vegetable

कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो कीटनाशक शरीर और जमीन दोनों के लिए खतरनाक है, जबकि शराब या अल्कोहल छिड़काव करने के एक घंटे बाद उड़ जाती है। कीटनाशकों का असर उत्पाद यानी सब्जियों तक रहता है। वहीं शराब का असर बमुश्किल घंटेभर रहता है।

देसी शराब के पव्वे में 180 एमएल शराब होती है। इतने में करीब ढाई बीघा फसल पर छिड़काव किया जा सकता है। वहीं, 300 से 350 रुपये की कीटनाशक से 5 बीघा खेत में छिड़काव होता है।

किशनपाल, किसान का कहना है कि  बड़ी संख्या में किसान देसी शराब का छिड़काव कर अच्छी पैदावार ले रहे हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सब्जी पर शराब का कोई प्रतिकूल असर नहीं होता है। कीटनाशक महंगे हैं। शरीर और जमीन पर भी इसका गलत असर पड़ता है।
 
डॉ. रमेश सिंह यादव, सहायक प्रो. प्लांट पैथोलॉजी, कृषि विवि मेरठ ने बताया कि सब्जियों पर शराब के छिड़काव से होने वाले लाभ या हानि के संबंध में कोई रिसर्च नहीं किया गया है। इसलिए विज्ञान किसानों को ऐसा करने की इजाजत नहीं देता है। हो सकता है किसानों ने अपने तरीके से कोई प्रयोग कर लिया हो। यह बात सही है कि अल्कोहल से कीट मर जाते हैं। कीटनाशक का असर फल और पौधे पर अधिक समय तक रहता है, जबकि अल्कोहल के साथ ऐसा नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed