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खराब फसल देख किसान ने उठाया खौफनाक कदम

Thu, 09 Apr 2015 09:00 AM IST
Updated Thu, 09 Apr 2015 09:00 AM IST
farmer's suicide due to bad corps

मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल देखकर चौमुंहा ब्लॉक के गांव तरौली सुमाली निवासी किसान शिशुपाल ने आत्मदाह कर लिया। किसान पर छह लाख का कर्ज भी था। इलाज के लिए आगरा ले जाते समय उनकी मौत हो गई। बुधवार को इस घटना से लोग सन्न रह गए हैं।



जिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि मौके पर एसडीएम को भेजा है। गांव तरौली सुमाली के मोहल्ला परुआ निवासी शिशुपाल (40) पुत्र गालिया ओलावृष्टि से फसल तबाह होने से बहुत परेशान थे। इन दिनों परिवारीजनों के साथ आसपास के लोगों से भी कम बातें करने लगे थे।


बुधवार को शिशुपाल सुबह नौ बजे खेत से लौटने के बाद वह घर की छत पर चढ़ गए। यहां उन्होंने अपने शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। छत पर अचानक आग की लपटें उठती देख परिवारीजन ऊपर भागे।
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यहां आग से घिरे शिशुपाल को देखकर पड़ोसियों ने भी चीखपुकार मचा दी। पल भर में लोग छत पर पहुंचकर शिशुपाल को आग की लपटों से बचाने में जुट गए। किसी तरह लोगों ने शिशुपाल के शरीर में लगी आग बुझाई। तब तक वह काफी जल चुके थे।

घर की छत पर मिट्टी का तेल छिड़ककर लगाई आग

farmer's suicide due to bad corps

इस हालत में उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले गए जहां से आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा ले जाते समय शिशुपाल की मौत हो गई। शिशुपाल की पत्नी ब्रजलता ने बताया कि ओले पड़ने के बाद से ही वह तनाव में थे। बुधवार को सुबह खेत से लौटने के बाद किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की।

गांव के पूर्व प्रधान पूरन सिंह और पूर्व प्रधान प्रतिनिधि मलखान सिंह ने बताया कि शिशुपाल के पास एक एकड़ खेत है। उस पर करीब छह लाख रुपये कर्ज था जिसमें कुछ बैंक और कुछ लोगों से उधार लिया था।

शिशुपाल की चार संतान मानवेंद्र 16 वर्ष, सोनू 12 वर्ष, डोली आठ वर्ष और विमलेश उम्र छह वर्ष हैं। एक लड़की की शादी हो चुकी है। खेतीबाड़ी से ही परिवार का भरण पोषण हो रहा था। इस बार फसल अच्छी थी लेकिन कुदरत की मार से वह विचलित हो गए थे।

घटना की सूचना पर डीएम राजेश कुमार के निर्देश पर एसडीएम छाता सुरेंद्र सिंह ने घटना स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार और पड़ोसियों से बातचीत की है।

हाथरस में आलू किसान ने लगाई फांसी

farmer's suicide due to bad corps

फसल की बर्बादी लगातार किसानों की जान ले रही है। अब एक और किसान ने फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जान दे दी। हाथरस तहसील के गांव रामगढ़ के इस किसान ने खेत पट्टे पर लिया था और फसल में हुए घाटे से वह बेहद परेशान था। इसी के चलते उसने यह कदम उठाया।

घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया। सूचना मिलने पर तहसील की टीम भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी की। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। बाद में गमगीन माहौल में उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

हाथरस के ब्लाक मुरसान के गांव रामगढ़ निवासी सत्यप्रकाश (42 वर्ष) पुत्र चोखेलाल पर किसी समय अपनी 20 बीघा जमीन थी। कई सालों से वह फसल में घाटा झेल रहा था और इसी के चलते लगातार उसकी जमीन बिक रही थी। स्थिति यह हो गई कि वह भूमिहीन किसान हो गया।

इस पर इस साल उसने अपने बड़े भाई भरत सिंह से 22 बीघा जमीन पट्टे पर ली। इसमें उसने आलू की खेती की। परिजनों के मुताबिक मौसम की मार में उसे इस खेती में काफी घाटा हुआ। आलू की क्वालिटी काफी खराब हो गई।

आलू को बेचने के लिए वह जयपुर तक गया लेकिन वहां भी बहुत कम दामों में इसे बेचकर वापस आ गया। परिवार के बोझ और फसल में हुए घाटे से वह काफी परेशान था। मंगलवार की रात्रि एकाएक वह घर से गायब हो गया। परिजनों ने काफी तलाश किया लेकिन वह नहीं मिला।

रात्रि करीब 11 बजे लोगों ने सत्यप्रकाश की लाश उसी खेत के पेड़ पर झूलती हुई दिखाई दी, जिस पर उसने फसल की थी। मौके पर काफी भीड़ लग गई। वहां कोहराम मच गया। शव को नीचे उतारा गया। सुबह 10 बजे के बाद वहां पुलिस पहुंची और फिर तहसील की टीम भी गई।

पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। उसके बाद गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। भाई भरत सिंह व अन्य परिजनों का कहना है कि फसल की बर्बादी से उसका भाई परेशान था और इसी वजह से उसने आत्महत्या की है।

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