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बर्बाद फसल को खेत में ही फूंक कर खूब रोए किसान

Sat, 18 Apr 2015 01:56 AM IST
Updated Sat, 18 Apr 2015 01:56 AM IST
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farmer burnt his crop

जिस फसल को पसीना बहाकर किसानों ने तैयार किया था, उसमें आग लगाते हाथ कांप रहे थे, लेकिन इनका मानना है कि इसके अलावा इनके पास और कोई चारा भी नहीं है। असमय बारिश और ओलावृष्टि फसल बर्बाद हो गई है। गेहूं की बालियों में दाने नहीं हैं। एक एकड़ खेत में करीब एक क्विंटल गेहूं निकला है।

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इतने से तो फसल की कटाई, मड़ाई और ढुलाई का भी खर्च भी नहीं निकलता दिख रहा है। ऐसे में किसान अपनी फसल को खेत में जलाने को विवश हो गए। वहीं इसी गांव में दोपहर में बारिश होती देखकर किसान कुबेर को खेत में चक्कर आ गया और वह गश खाकर गिर गए।
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रामकोला इलाके के तरकुलवा गांव में शुक्रवार को मुन्नीलाल गुप्ता ने खेत में फसल को जलाने का कदम उठाया तो उनके साथ और कई किसान आ गए। फसल जलती देख कुछ किसानों की आंखें नम हो गई थीं। किसानों ने बताया कि किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने घर के जरूरी काम के लिए रखी रकम को खेती पर खर्च की।

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तरकुलवा गांव में किसानों ने मजबूरी में उठाया कदम

farmer burnt his crop

अबके अपने-अपने अरमान थे। पिछली फसल खराब मौसम से बर्बाद हो गई थी। इस बार बारिश, ओलावृष्टि और पायरिला कीटों ने बाकी फसल तबाह कर दी। फसल की हालत ऐसी है कि उसे कटवाने में भी नुकसान होना है। ऐसे में इसे जलाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं सूझा।

किसान मुन्नीलाल ने कहा कि उनके ओर बेटे प्रमोद, विनोद, अजय, मनोज के नाम से चार एकड़ खेती है। किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण लेकर गेहूं की फसल बोई गई थी। बारिश और ओलावृष्टि से जो फसल बची है, उसकी बालियों में दाने नहीं हैं। मदद के नाम फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।

परमहंस गुप्ता ने कहा कि जो गेहूं की बालियां बची हैं, उनमें दाना नहीं हैं। रह-रह कर बारिश हो रही है। खेत में काट कर रखी गई फसल सड़ गई। बच्चू, विंदेश्वरी, रूपइ, रघू, चंद्रपाल, धारी, झोटिल, छेदी आदि किसानों ने कहा कि हम लोग छोटे काश्तकार हैं।

बारिश से मुश्किलें और बढ़ीं

farmer burnt his crop

कर्ज लेकर खेती करते हैं। पर इस बार हमारे नसीब में दुख और दर्द ही लिखा है। गेहूं की पैदावार इतनी कम हुई है कि सोचकर रोना आ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि हम और हमारे परिवार के लोग खाएंगे क्या और कर्ज कैसे चुकाया जाएगा।

शुक्रवार को हुई बारिश से किसानों के चेहरे मुरझा गए। गेहूं की फसल खेतों में भीग गई है। किसान पहले से ही परेशान हैं, अब और मुश्किल बढ़ गईं। कोटवां गांव के खेत में कैलाशी देवी, अर्जुन, श्यामसुंदर का गेहूं मड़ाई करते समय बारिश आने से भीग गया।

इनका कहना है कि इस बार फसल की लागत निकलनी मुश्किल है। गांवों के कई खेत में गेहूं का बोझ बारिश से भीग गया है। गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है। खलिहान में मड़ाई के लिए रखा गया गेहूं का बोझा भीग गया है।

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