50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रहे बेटे-बेटियां
परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति करने के लिए अक्सर देश की राजनीति में एक ही परिवार को निशाना बनाया जाता है। जबकि इस बार लोकसभा चुनावों में कम से कम 50 सीटें ऐसी हैं, जिस पर किसी न किसी नेता का बेटा या बेटी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस प्रक्रिया में भाजपा भी कांग्रेस से पीछे नहीं है। अगर कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत जैसे नेता हैं, तो भाजपा में भी संजय गांधी के बेटे वरुण गांधी के अलावा पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रमोद महाजन की बेटी को चुनाव में उतारा है।
मौजूदा सांसद अभिजीत मुखर्जी पश्चिम बंगाल की जंगीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी अमेठी से मैदान में हैं।
ज्यादातर पार्टियों में है परिवारवाद
कांग्रेस में नंबर तीन की भूमिका रखने वाले वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी इस बार अपनी जगह शिवगंगा सीट से बेटे कार्ति पर भरोसा जताया है।
उधर, भाजपा की ओर से संजय गांधी और मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी इस बार सुल्तानपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे जबकि उनकी मां पीलीभीत से चुनाव लड़ेंगी। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत को झारखंड की हजारीबाग सीट से टिकट दिया गया है।
कांग्रेस में ही राज्यसभा सांसद मुरली देवड़ा के बेटे व केंद्रीय राज्य मंत्री मिलिंद देवड़ा को दक्षिण मुंबई से उम्मीदवार बनाया गया है। वह इसी सीट से मौजूदा सांसद हैं। एनसीपी प्रमुख व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती सीट से चुनाव लड़ेंगी। इस तरह ऐसे कई नेता हैं, जो वंशवाद को आगे बढ़ा रहे हैं।
दिवंगत नेताओं की विरासत परिवार को
कांग्रेस के पूर्व नेता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की गुना सीट पर फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। इसी तरह स्वर्गीय राजेश पायलट के बेटे व केंद्रीय राज्य मंत्री सचिन पायलट राजस्थान की अजमेर सीट से खड़े हुए हैं।
स्वर्गीय जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट से टिकट दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व अभिनेता सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त नार्थ सेंट्रल मुंबई से एक बार फिर अपनी सीट बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
जबकि उन्हें टक्कर भाजपा के पूर्व दिग्गज नेता दिवंगत प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन दे रही हैं। जबकि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली से ताल ठोक रहे हैं।
मुख्यमंत्री भी पीछे नहीं
अपने बेटे-बेटियों को राजनीतिक विरासत सौंपने में मुख्यमंत्री भी पीछे नहीं हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र भी रोहतक से सांसद हैं। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव कालियाबोर से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि दिल्ली की पूर्व सीएम व वर्तमान में केरल की गवर्नर शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित फिर से पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार हैं।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दुष्यंत झालावर सीट से जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन कुमार के बेटे अभिषेक राजनांदगांव से चुनाव लड़ रहे हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह इटाह से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसी तरह हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई हिसार से चुनाव लड़ रहे हैं।
उनका सामना दुष्यंत चौटाला से है, जो एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं। पूर्व सीएम बंसी लाल की पोती श्रुति चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ रही हैं। हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम प्रकाश धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर भी फिर से हमीरपुर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
क्षेत्रीय पार्टी भी पीछे नहीं
बिहार में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती, लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान के बेटे चिराग को टिकट दी गई है।
कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) प्रमुख एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारास्वामी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा की बेटी गीता शिवराजकुमार भी चुनावी मैदान में हैं।
यूपी में राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख अजित सिंह खुद तो मैदान में हैं ही, साथ ही उनके बेटे जयंत चौधरी भी फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।