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ट्रेन में छूटा पर्स मिला वापस, रखा हुआ था हीरा

Fri, 20 Mar 2015 04:00 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Mar 2015 04:00 PM IST
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Family Forgets Purse with Diamonds in Train, Gets it Back

ट्रेन में सफर करने वाले लोग अक्सर कोच अटैंटेंड के खराब व्यवहार की शिकायत करते रहते हैं, लेकिन भायंदर के एक परिवार ने एक कोच अटैंटेंड की ईमानदारी की तारीफ की है।

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मुंबई की ओर लौट रहे शर्मा परिवार को ट्रेन से उतरने के बाद जब अहसास हुआ कि उनका पर्स ट्रेन में ही छूट गया है तो उनके होश उड़ गए। उस पर्स में एक फोन के साथ-साथ हीरे की ईयरिंग भी रखी थीं, जिसकी कीमत करीब एक लाख रुपए थी।
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गनीमत रही एक कोच अटैंटेंड ने इस परिवार के छूटे हुए पर्स को देख लिया और उसने उसी दिन शर्मा परिवार के हाथों में थमा दिया। पर्स मिलते ही इस परिवार ने इस अटैंडेंट का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
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आरपीएफ ने दिलाया भरोसा

Family Forgets Purse with Diamonds in Train, Gets it Back

दीपक शर्मा अपनी पत्नी, बेटी, बड़े भाई और भाभी के साथ अपने गृहनगर जयपुर से मुंबई का सफर कर रहे थे। 15 मार्च को ट्रेन मुंबई के बोरीवली स्टेशन पर सुबह 6:40 बजे पहुंची। यह परिवार अपने सामान के साथ प्लेटफॉर्म पर उतर गया।

इसके बाद यह परिवार भायंदर के लिए उपनगरीय ट्रेन में चढ़ा। करीब 15-20 मिनट के बाद परिवार को अहसास हुआ कि उनका एक पर्स गायब है। जिसमें हीरे की इयरिंग और मोबाइल फोन रखा हुआ था। दीपक शर्मा की भाभी ने बताया कि इसमें उनके क्रेडिट और डेबिट कार्ड भी थे।

उन्होंने बताया कि अच्छी बात यह रही कि उनके पास आरपीएफ स्टाफ का नंबर था और उन्होंने तुरंत उनसे संपर्क किया। दीपक ने बताया कि आरपीएफ ने हमें भरोसा दिलाया कि हमारा सामान हमें वापस मिल जाएगा।

परिवार ने तुलसीदास को दिया ईनाम

Family Forgets Purse with Diamonds in Train, Gets it Back

आरपीएफ स्टाफ ने मुंबई सेंट्रल के इंस्पेक्टर नरेंद्र वर्मा से संपर्क किया और फिर उन्होंने ट्रेन के कोट अटैंडेंट तुलसीदास मिश्रा को फोन लगाया। मिश्रा तुरंत उस कोच में गए और उन्होंने देखा कि तकिए के नीचे एक पर्स रखा हुआ था।

जब तुलसी ने पर्स खोला तो उसके भीतर एक फोन रखा हुआ था जो कि स्विच्ड ऑफ था। उसने तुरंत फोन चार्ज कर हमारे लैंडलाइन नंबर पर फोन किया। यह परिवार अपना खोया हुआ पर्स पाकर हैरान हो गया।

इतना ही नहीं इस परिवार ने तुलसीदास को अपने घर पर बुलाकर ईनाम भी दिया। पश्चिमी रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त आनंद विजय झा ने बताया कि वो खुश हैं कि आरपीएफ और अटैंडेंट ने उस परिवार की मदद की। उन्होंने कहा कि हमें आगे भी ऐसा बेहतर होने की उम्मीद है।

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