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जयललिता ने गढ़ी ऐसी कहानी, जज हो गए भौंचक्के

Wed, 01 Oct 2014 07:52 PM IST
Updated Wed, 01 Oct 2014 07:52 PM IST
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fake scheme used to explain away huge money in jayalalithaa case

आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार साल की सजा पा चुकीं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की संपत्ति पांच सालों में तीन करोड़ से 66.65 करोड़ हो गई थी।

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संपत्ति में 22 गुना वृद्घि कैसे हुई? जयललिता और मामले में एक अन्य आरोपी शशिकला से विशेष अदालत में ये सवाल कई बार पूछा गया। उन्होंने अपनी सफाई में कई कहानियां गढ़ी, हालांकि जज को उन पर बिलकुल ही यकीन नहीं हुआ।
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जयललिता और शशिकला ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जया पब्लिकेशन के जरिए एक सदस्यता योजना चलाई, जिससे 14 करोड़ रुपए अर्जित किए गए। विशेष अदालत के जज जेम्स माइकल कुन्हा ने जया और शशिकला की सफाई को स्वीकार नहीं किया।

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अखबार से 14 करोड़ रुपए जुटाए

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अंग्रेजी दैनिक दी हिंदू ने जयललिता के मामले ने दिए गए कोर्ट के फैसले की कॉपी के हवाला देकर बताया कि जयललिता और शाशिकला 1990 में जया पब्लिकेशन में पार्टनर बनी थीं।

उसी वर्ष उन्होंनें 'डॉक्टर नमाथू एमजीआर' अखबार के लिए आ‌जीवन सदस्यता योजना शुरू की। ये अखबार जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके का मुखपत्र है। योजना से उन्होंने 14 करोड़ रुपए जुटाए।

हर सदस्य से 3000 रुपए लिए गए और उसे अखबार की कॉपी दी गई। विशेष अदालत के जज जेम्स माइकल कुन्हा ने सदस्यता योजना की जांच के बाद कहा कि जयललिता के पक्ष ने योजना के बारे में जानकारी आरोप पत्र दाखिल होने के बाद दी।

जज ने खा‌रिज कर दी कहानी

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जज ने फैसले में कहा, 'ऐसे कोई सबूत नहीं मिला पाया कि जयललिता के खिलाफ मामला दर्ज होने के पहले ऐसी कोई योजना अस्तित्व में थी।'

कोर्ट में जयललिता के वकीलों ने इनकम टैक्स रिटर्न भरने की बात भी कही लेकिन जज ने उन तर्को को खारिज करते हुए कहा कि 1998 में द‌ाखिल आईटी रिटर्न में ही सदस्यता योजना का जिक्र किया गया।

उन्होंने माना की योजना पुरानी थी तो पहले जिक्र क्यों नहीं किया गया।

बंगलौर की विशेष अदालत ने शनिवार को आय से अधिक संपत्ति के मामले में जयललिता को चार साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उन पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

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