फैजाबाद हिंसाः संवेदनशीलता के आकलन में हुई चूक

फैजाबाद/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 27 Oct 2012 07:35 AM IST
faizabad violence is result of failure to assess sensitivity
अयोध्या के बड़े आंदोलनों में कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने का अनुभव भी इस बार फैजाबाद जिला प्रशासन के काम नहीं आया। क्षण भर में माहौल बदला, शहर से देहात तक भीड़ सड़कों पर उतरी, बवाल, मारपीट और आगजनी के बीच अराजकता सड़कों पर घंटों नाचती रही। अब कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। शहर का आवाम कर्फ्यू के साए में है। शांति व सुरक्षा की मशीनरी को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ रहा है।  

खास बात यह है कि फैजाबाद दो दशक तक अयोध्या के बड़े आंदोलनों का स्थल रहा है। सड़क पर लाखों की भीड़ के बावजूद अराजकता का माहौल नहीं बनने पाया। इस दौरान कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी इसी जिला प्रशासन की होती थी। अफसरों के साथ इसी शहर के लोगों ने शांति कायम रखी। कुछ एक अपवादों को छोड़ दिया जाए तो फैजाबाद शहर में ऐसा तब भी नहीं हुआ जब अयोध्या का आंदोलन चरम पर था। हालात तो तब भी नहीं बिगडे़, जब एक नहीं दो-दो बार आतंकी घटनाएं घटित हुईं।

इस बार भी अफसरों के साथ मशीनरी वही थी, बावजूद इसके बवाल के पीछे एक अहम कारण यहां की संवेदनशीलता के आकलन में चूक है। साल दर साल यहां के आयोजनों को लेकर पहले से मुतमईन हो जाना नुकसानदायक साबित हुआ तो शहर और आसपास इस प्रकृति की घटनाओं पर शिथिल कार्रवाई से ऊंचे हुए मनोबल ने भी घटना का मार्ग प्रशस्त किया। जिसका आभास खुफियातंत्र को भी नहीं हो पा रहा था। अफसर तो बातचीत में अनौपचारिक रूप से भी मजिस्ट्रेटी जांच से ही कारण के खुलासे की बात करते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता आलोक द्विवेदी कहते हैं कि शहर के लोगों को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी। इसके पीछे आंकलन में चूक को ही कारण माना जाएगा। स्‍थानीय निवासी राजेश सिंह का मानना है कि कारण तो कई हैं, लेकिन अयोध्या फैजाबाद के अतीत पर शासन-प्रशासन की ओर से ध्यान न दिया जाना अहम कारण रहा।

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