फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   failure of exit polls and elections in india

फेल होते रहे हैं एग्जिट पोल, क्या इस बार होंगे पास?

Fri, 06 Dec 2013 01:35 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 06 Dec 2013 01:35 PM IST
विज्ञापन
failure of exit polls and elections in india

विधानसभा चुनावों में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा और किसे हार नसीब होगी, इसका फैसला रविवार को होगा लेकिन चुनाव बाद आए सर्वेक्षणों से कई पार्टियों की बांछे खिल गई हैं तो कइयों में खलबली मची हुई है।

विज्ञापन


एग्जिट पोल के नतीजों की मानें तो केंद्र की सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो सकता है।

इन सर्वेक्षणों के मुताबिक, भाजपा न केवल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपना किला बरकरार रखेगी, बल्कि दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर देगी।
विज्ञापन


पढि़ए, सेमीफाइनल में बजेगा भाजपा का डंका


सभी चैनलों के एग्जिट पोल में सियासत की नई खिलाड़ी ‘आप’ के दमदार आगाज का कयास लगाया जा रहा है। दिल्ली में आप भाजपा और कांग्रेस की उठापटक के बीच दूसरे नंबर की पार्टी बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एग्जिट पोल के ये अनुमान 8 दिसंबर को आने वाले नतीजों के करीब होंगे या बिल्कुल ही उलट, ये तो उस दिन ही तय होगा लेकिन पिछले चुनावों की मानें तो ये अनुमान अक्सर औंधे मुंह गिरे हैं।

पढि़ए, एग्जिट पोल के कयासों और नतीजों की हकीकत के बीच के ऐसे ही चौंकाने वाले अंतर-

2004 में राजग का बज रहा था डंका
एग्जिट पोल के अनुमानों को 2004 लोकसभा चुनावों में मुंह की खानी पड़ी थी। तत्कालीन सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सभी चुनाव पूर्व और चुनाव बाद सर्वेक्षणों में धूम थी।

स्टार न्यूज के सर्वेक्षणों में राजग को स्पष्ट बहुमत के करीब बताया जा रहा था। कयास थे की चुनाव में बाद राजग को 263 से 275 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 174 से 186।

आज तक का अनुमान था कि 543 सदस्यों की लोकसभा में राजग को 248 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 189।

दिग्विजय ने माना, मोदी बन सकते हैं प्रधानमंत्री

सहारा समय के अनुसार राजग को बहुमत मिलने की पूरी संभावना थी। ये चैनल राजग को 263 से 278 सीटें दे रहा था, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 171 से 181।

हालांकि नतीजे इन कयासों की बिलकुल उलट रहे। 2004 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और उसके सहयोगियो को 218 और राजग को 181 सीटें मिलीं थीं।

चुनाव बाद कांग्रेस ने सहयोगियों के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का गठन कर 335 सदस्यों के साथ सरकार बनाने को दावा पेश किया था।

हवा भी न लगने दी यूपी के वोटरों ने
कयासों की औंधे मुंह गिरने की 2004 जैसी ही कहानी 2007 में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की भी है।

2007 में सभी एग्जिट पोल में उत्तर प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगा रहे थे।

चुनाव के पहले चरण के बाद एनडीटीवी का अनुमान था कि बसपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, सपा तीसरे स्थान पर खिसक जाएगी और दूसरे स्थान पर काबिज होगी भाजपा।


अनुमान था कि बसपा के हिस्से 120 से 130 सीटें आएंगी, भाजपा 110 से 120 सीटों पर जीत दर्ज करेगी और सपा 105 से 115 सीटें पा सकती है।

नतीजे इससे बिल्कुल उलट थे। यूपी के मतदाताओं ने हवा भी न लगने दी और बसपा को स्पष्ट बहुमत दे डाला। 403 सदस्यों की विधानसभा में बसपा को 206, समाजवादी पार्टी को 97, भाजपा को 51 और कांग्रेस को 22 सीटें हासिल हुई।

कुछ ऐसा ही 2012 में हुआ। मायावती के दूसरे नंबर पर आने और सपा के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने की संभावना सबने जताई।

लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैलियों के कारण कांग्रेस के तीसरे नंबर पर आने का जो अनुमान लगाया जा रहा था, उसे मुंह की खानी पड़ी।

स्टार न्यूज का अनुमान था कि कांग्रेस यूपी में 62 सीटें हासिल कर सकती है। आज तक ने 38 से 42 सीटें दीं, इंडिया टीवी ने 39 से 55 और इंडिया न्यूज ने 24 ने 55।

लेकिन नतीजे आए तो सबसे ज्यादा निराशा राहुल गांधी को ही हुई। कांग्रेस 2007 की सीटों से महज 6 सीटें ही अधिक जीत पाई। 2007 में कांग्रेस की 22 सीटें थी और 2012 में 28।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed