ये गलतियां पढ़ेंगे तो भूल जाएंगे मोदी को!
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महात्मा गांधी की हत्या कब हुई थी? आप जवाब देंगे-30 जनवरी, 1948, लेकिन किसी किताब में इसका जवाब 31 अक्तूबर, 1948 हो तो? आप पूछ बैठेंगे कि फिर 30 जनवरी, 1948 को किसकी हत्या हुई थी?
यही किताब आपको बताए कि दूसरे विश्वयुद्घ में जापान ने अमेरिका पर परमाणु हमला किया था, अमेरिका ने जापान पर नहीं! तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? दरअसल, ये तथ्य गढ़े नहीं गए, बल्कि इतिहास की किताब में छपे हैं। गलतियों से भरी ये किताब में गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) ने प्रकाशित की है। कक्षा आठवीं के 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को ये किताब पढ़ाई भी जा रही है।
किताब के तथ्यों को पढ़कर आपको राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की इतिहास की गलतियां कमतर लग सकती हैं।
ये गलतियां तो मामूली हैं, आगे पढ़िए
किताब में ऐसे-ऐसे तथ्य हैं कि आप अपना सर पीट लें। जैसे, ये किताब बताती है कि दादा भाई नौरोजी, सुरेंद्र नाथ बनर्जी और गोपाल कृष्ण गांधी कांग्रेस के गरम धड़े के सदस्य थे। जबकि इतिहास की मानें तो ये नरम दलीय थे।
किताब का एक तथ्य तो आपको बिल्कुल ही चौंका देगा। आठवीं के बच्चों को ये किताब बताती है कि 1947 में भारत के विभाजन के बाद एक नए मुल्क का गठन हुआ, जिसका नाम था- इस्लामिक इस्लामाबाद।
मुल्क की राजधानी है खैबर घाट, जो हिंदुकुश के पहाड़ों में बसी है। ये बताने की जरूरत नहीं है कि 1947 में हिंदुस्तान के विभाजन के बाद जिस मुल्क का गठन हुआ, वह पाकिस्तान है और इस्लामाबाद इसकी राजधानी।
गुजरात सरकार वापस नहीं लेगी किताब
टीओआई ने किताबों की गलतियों के बारे में एक रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 124 पन्ने की किताब में 59 तथ्यात्मक गलतियां हैं। अंग्रेजी में छपी इस किताब में 100 से अधिक वर्तनी की गलतियां हैं। क्रांतिकारियों और समाजसुधारकों के नामों में तमाम गलतियां की गई हैं।
गलतियों की सफाई में गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्ट बुक के कार्यकारी अधिकारी नितिन पाटनी ने बताया कि उन्हें गलतियां के बारे में जानकारी है।
उन्होंने बताया कि गलतियों की सूची तैयार की जा रही है और उसे इंटरनेट पर डाल दिया जाएगा। किताब को वापस लेना फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन गलतियों में सुधार किया जाएगा।