फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   factual errors in history book for kids in narendra modi gujarat

ये गलतियां पढ़ेंगे तो भूल जाएंगे मोदी को!

Sat, 08 Feb 2014 06:37 PM IST
Updated Sat, 08 Feb 2014 06:37 PM IST
विज्ञापन
factual errors in history book for kids in narendra modi gujarat

महात्मा गांधी की हत्या कब हुई थी? आप जवाब देंगे-30 जनवरी, 1948, लेकिन किसी किताब में इसका जवाब 31 अक्तूबर, 1948 हो तो? आप पूछ बैठेंगे कि फिर 30 जनवरी, 1948 को किसकी हत्या हुई थी?

विज्ञापन


यही किताब आपको बताए कि दूसरे विश्वयुद्घ में जापान ने अमेरिका पर परमाणु हमला किया था, अमेरिका ने जापान पर नहीं! तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? दरअसल, ये तथ्य गढ़े नहीं गए, बल्कि इतिहास की किताब में छपे हैं। गलतियों से भरी ये किताब में गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) ने प्रकाशित की है। कक्षा आठवीं के 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को ये किताब पढ़ाई भी जा रही है।
विज्ञापन


किताब के तथ्यों को पढ़कर आपको राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की इतिहास की गलतियां कमतर लग सकती हैं।

ये गलतियां तो मामूली हैं, आगे पढ़िए

factual errors in history book for kids in narendra modi gujarat

किताब में ऐसे-ऐसे तथ्य हैं कि आप अपना सर पीट लें। जैसे, ये किताब बताती है कि दादा भाई नौरोजी, सुरेंद्र नाथ बनर्जी और गोपाल कृष्‍ण गांधी कांग्रेस के गरम धड़े के सदस्य थे। जबकि इतिहास की मानें तो ये नरम दलीय थे।

किताब का एक तथ्य तो आपको बिल्कुल ही चौंका देगा। आठवीं के बच्‍चों को ये किताब बताती है कि 1947 में भारत के विभाजन के बाद एक नए मुल्क का गठन हुआ, जिसका नाम था- इस्लामिक इस्लामाबाद।

मुल्क की राजधानी है खैबर घाट, जो हिंदुकुश के पहाड़ों में बसी है। ये बताने की जरूरत नहीं है कि 1947 में हिंदुस्तान के विभाजन के बाद जिस मुल्क का गठन हुआ, वह पाकिस्तान है और इस्लामाबाद इसकी राजधानी।

गुजरात सरकार वापस नहीं लेगी किताब

factual errors in history book for kids in narendra modi gujarat

टीओआई ने किताबों की गलतियों के बारे में एक रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 124 पन्ने की किताब में 59 तथ्यात्मक ग‌ल‌तियां हैं। अंग्रेजी में छपी इस किताब में 100 से अधिक वर्तनी की गलतियां हैं। क्रांतिकारियों और समाजसुधारकों के नामों में तमाम ग‌लतियां की गई हैं।

गलतियों की सफाई में गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्‍कूल टेक्‍स्ट बुक के कार्यकारी अधिकारी नितिन पाटनी ने बताया कि उन्हें गलतियां के बारे में जानकारी है।

उन्होंने बताया‌ कि गलतियों की सूची तैयार की जा रही है और उसे इंटरनेट पर डाल दिया जाएगा। किताब को वापस लेना फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन गलतियों में सुधार किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed