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नेहरू गोपनीय तरीके से देना चाहते थे नेताजी की विधवा को मदद

Sun, 24 Jan 2016 03:57 AM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 03:57 AM IST
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facts on netaji subhas chandra bose and pandit jawahar lal nehru after Declassification of files

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू गोपनीय तरीके से भारत सरकार की ओर से नेताजी की विधवा को आर्थिक मदद देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बाकायदा वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से लिखित सलाह भी मांगी थी।

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मंत्रालय सहमत भी हुआ लेकिन नेताजी की विधवा ने राशि नहीं ली। बाद में कांग्रेस ने ट्रस्ट बनाकर वर्ष 1965 तक नेताजी की पुत्री अनीता बोस को छह हजार रुपये सालाना मदद दी।
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नेताजी से जुड़ी फाइलों में दर्ज दस्तावेज बताते हैं कि नेहरू ने 12 जून 1952 को वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से सलाह मांगी थी। इसमें उन्होंने लिखा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विधवा को विएना में 100 पाउंड की मदद देना कैसे संभव हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने इस पर 26 जून 1952 को सहमति जताई। इस सहमति पर बी एन कौल के दस्तखत हैं।

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नेता जी की पुत्री को भी मिली मदद

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वित्त मंत्रालय ने कहा कि विएना में भारतीय वाइस काउंसल के प्राइवेट एकाउंट में यह राशि जमा की जा सकती है। इस राशि को आसफ अली के निर्देश पर उपहार या नकद राशि के रूप में नेताजी की विधवा को सौंपा जा सकता है।

बाद में 1954 में कांग्रेस ने एक ट्रस्ट बनाया। प्रधानमंत्री नेहरू और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र राय इसके ट्रस्टी थे। नेहरू ने इसका जिक्र करते हुए लिखा है कि ट्रस्ट के बारे में मूल दस्तावेज कांग्रेस कार्यालय को सौंप दिया गया है।

तब इसके लिए 2 लाख रुपये जमा कराए गए थे। इसके तहत नेताजी की पुत्री को विवाह होने तक 1965 तक छह हजार रुपये सालाना मिलता रहा। बाद में जीडी खोसला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस ट्रस्ट के जरिये नेताजी की पुत्री को मदद का जिक्र किया।

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