सरकार ने माना हादसे में हुई नेताजी की मौत, परिवार नहीं मानता
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नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किए जाने के बाद भी बोस के मौत से जुड़ी रहस्यों से पर्दा नहीं हट पाया है। बोस के परिवार वालों ने पीएम मोदी के प्रयास की सराहना तो की है। मगर विमान दुर्घटना में उनकी मौत के बात को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर फाइल नष्ट करने का आरोप भी मढ़ा है।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए बोस परिवार के सदस्य चंद्र कुमार बोस ने कहा कि यह भारत में पारदर्शिता का दिन है। हम प्रधानमंत्री के इस कदम का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में इस सरकार के रुख में बदलाव आया है। सबसे पहले नेताजी के बारे में तथ्यों को दबाने के रुख को त्यागा गया। नेताजी के बारे में सचाई सामने लाने में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि सत्य को छिपाने के प्रयास में कांग्रेस शासन में नेताजी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण फाइलों को नष्ट कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस बात को समझाने और प्रमाणित करने के लिए उनके पास दस्तावेजी सबूत हैं। चंद्र बोस ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह जर्मनी, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन में बोस से जुड़ी रखी फाइलों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करे।
मोदी सरकार के फैसले की तारीफ
वर्तमान सार्वजनिक फाइलों पर कोई बड़ी टिप्पणी से बचते हुए उन्होंने कहा कि
अभी सभी फाइलों का अध्ययन नहीं किया है। लेकिन विमान दुर्घटना में नेताजी
के मौत के मामले पर उन्होंने कहा कि जो कुछ हमने देखा है, उससे विमान
दुर्घटना के बारे में निष्कर्ष निकालने लायक साक्ष्य नहीं हैं। जो साक्ष्य
हैं वह परिस्थितिजन्य हैं।
चंद्र बोस ने कहा कि यहां तक कि एक पत्र में
हमने देखा, जो लाल बहादुर शास्त्री द्वारा सुरेश बोस को लिखा गया था और
उसमें विमान दुर्घटना का निष्कर्ष निकालने लायक साक्ष्य नहीं होने की बात
है। केवल कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य की बात है। नेताजी के पौत्र अमिय
बोस ने कहा है कि आज का दिन देश के लिए बड़ा दिन है।
फाइलों के सार्वजनिक
होने से नेताजी के रहस्य से न सिर्फ पर्दा हटेगा बल्कि देश की आजादी में
उनके योगदान को नई पीढ़ी जान सकेगी। उन्होंने पीएम मोदी के प्रयास की बेहद
सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक बड़ा काम किया है। वहीं दूसरे पौत्र
अर्द्धेंदु बोस ने कहा है कि हम महसूस करते हैं कि इन फाइलों से इस विषय पर
कुछ प्रकाश पड़ेगा। बोस परिवार और सम्पूर्ण देश पिछले सात दशकों से इस पल
की प्रतीक्षा कर रह था।