2014 के चुनाव की 14 चौंकाने वाली बातें
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16वीं लोकसभा में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। देश के कोने-कोने में नरेंद्र मोदी की ऐसी जबरदस्त आंधी चली कि कांग्रेस ही नहीं, बल्कि बसपा, सपा, जदयू समेत कई क्षेत्रीय दल उड़ गए।
कई क्षेत्रीय दलों का सूपड़ा साफ हो गया तो कई हाशिए पर पहुंच गए। एग्जिट पोल के अनुमानों को पीछे छोड़ भाजपा ने अपने ‘मिशन 272 प्लस’ को पार करते हुए अकेले ही पूर्ण बहुमत पा लिया। अब देश के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे।
चुनाव में कई ऐसी चौंकाने वाली बातें हुई हैं, जो देश में पहले कभी नहीं हुई। पढ़िए, ऐसे ही तथ्यों के बारे में-
दो सीटों से 282 सीटों तक पहुंची भाजपा
1984 के बाद भाजपा देश की ऐसी ऐसी पहली पार्टी बन गई है, जिसने अपने दम पर बहुमत पाया है। भाजपा ने 282 सीटों पर जीत हासिल की है।
1980 में भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी के रूप में पुनर्गठित होने के बाद अगले लोकसभा चुनाव यानी 1984 में भाजपा मात्र दो सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। लेकिन 30 सालों के बाद ये पार्टी बहुमत पाने में कामयाब रही।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 112 सीटें ही हासिल की थीं।
170 सीटों के फायदे में रही भाजपा
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 112 सीटें हासिल की थीं, जबकि इन चुनावों में 282 सीटों पर कामयाबी पाई है। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा को 170 सीटों का फायदा हुआ। भाजपा ने 428 सीटों पर प्रत्याशी खड़ा किया था।
वर्ष 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को भारी बहुमत मिला था, उसके बाद से केंद्र में लगातार खिचड़ी सरकारें बनती रही हैं।
भाजपा के पूर्ण बहुमत के बाद खिचड़ी सरकारों की राजनीति का अंत हो सकता है।
भाजपा ने कई राज्यों में क्लीन स्वीप किया
16वें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में क्लीन स्वीप कर दिया है। केंद्र शासित प्रदेशों की अधिकांश सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी ही जीते हैं।
भाजपा ने गुजरात में 26, राजस्थान में 25, दिल्ली में 7, हिमाचल में 4, उत्तराखंड 5 और गोवा में 2 सीटें जीती हैं।
केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ की एक, दादरा और नगर हवेली की एक, दमन-दीव की एक सीट जीतने में भाजपा कामायाब रही है।
उत्तर प्रदेश में 80 में 71 सीटें झटक लीं
मोदी लहर पर सवार भाजपा ने सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 80 में 71 सीटें झटक लीं हैं।
पिछले दो लोकसभा चुनाव में भाजपा 10 सीटों ही जीत पाई थी। लेकिन मोदी की लहर में उत्तर प्रदेश में मात्र सोनिया गांधी और मुलायम सिंह यादव का परिवार बचा है। शेष सभी सीटों पर संघ परिवार हावी हो गया है।
दिल्ली में कांग्रेस की दुर्गत हुई
दिल्ली की सभी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। विधानसभा चुनावों में जोरशोर से आगाज करने वाली आम आदमी पार्टी सभी सीटों पर दूसरे स्थान रही। भाजपा के सभी उम्मीदवारों ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।
पिछले चुनाव में दिल्ली की सभी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था। इस बार वह तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। कांग्रेस की दुर्गत यहीं तक सीमित नहीं रही है। वोट प्रतिशत के मामले में दिल्ली में कांग्रेस, आप के आधे वोटों से से भी कम रह गई है।
भाजपा को 46.4 प्रतिशत वोट मिलें है, आप को 32.9 और कांग्रेस को महज 15.1 प्रतिशत वोट मिले हैं।
मायावती के लिए बुरा सपना बना चुनाव
दलितों की मसीहा रहीं मायावती के लिए यह चुनाव बुरा सपना साबित हुआ। लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को अपने दम पर रोकने का दावा कर रही मायावती उत्तर प्रदेश में अपनी अस्तित्व भी नहीं बचा पाई।
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी सभी 80 सीटों पर हार गए। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर वोट प्रतिशत के मामले में ये पार्टी तीसरे स्थान पर रही।
बहुजन समाज पार्टी को देश भर में 4.1 प्रतिशत वोट मिले। पिछली लोकसभा में बसपा के पास 20 सीटें थीं।
यूपी में भाजपा के 25 फीसदी वोट बढ़े
उत्तर प्रदेश में भाजपा को इस बार 25 फीसदी अधिक वोट हासिल हुए। पिछले लोकसभा चुनाव से भाजपा को इस बार 61 सीटें अधिक यानी कुल 71 सीटें मिली हैं।
सपा को पिछले लोकसभा चुनाव से मात्र एक फीसदी कम यानी 22.2 फीसदी वोट मिले, लेकिन सीटों में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। उसकी 17 सीटें कम हो गई हैं। सपा की पिछले लोकसभा चुनाव में 23 सीटें थीं लेकिन इस बार उसे मात्र पांच से ही संतोष करना पड़ रहा है।
प्रदेश में वोटों का सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस के खाते में गया है। कांग्रेस को 10.7 प्रतिशत वोट इस बार कम मिले हैं। इस कारण उसकी 21 से घटकर मात्र दो सीटें ही रह गई हैं।
बसपा के साथ रालोद भी साफ
उत्तर प्रदेश में वोट प्रतिशत के मामले में बसपा को आठ फीसदी का नुकसान हुआ है। इतने कम वोटों ने बसपा के पैरों तले जमीन ही खिसका दी है। बसपा का खाता ही नहीं खुल सका। पिछली बार उसके पास 20 सीटें थीं।
राष्ट्रीय लोकदल को 2.3 प्रतिशत कम वोट मिले तो उसकी पांचों सीटें छिन गईं।
इस बार रालोद का भी खाता नहीं खुल सका। वहीं, दो सीटों पर भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले अपना दल को इस चुनाव में भले ही एक फीसदी वोट मिला हो लेकिन उसके खाते में दोनों सीटें आ गई हैं।
इस बार के चुनाव में खूब चला नोटा
उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में नन ऑफ दि अबव (नोटा) का भी खूब प्रयोग किया। यूपी में जितने मत पड़े हैं उनमें से करीब पौन फीसदी मतदाताओं ने चुनाव में खड़े किसी भी प्रत्याशी पर भरोसा नहीं जताया है।
इस कारण मतदाताओं ने उन्हें वोट देने के बजाय नोटा के बटन को दबाया।
उत्तर प्रदेश में नोट का सबसे अधिक मत राबर्ट्सगंज सुरक्षित सीट पर मिला। राष्ट्रीय स्तर पर नोटा को 5996277 मतदताओं ने पसंद किया।
यूपी में नोटा को कहां पड़े कितने वोट?
यूपी मे राबर्ट्सगंज में सबसे ज्यादा 18489 वोट नोटा में डाले गए हैं। प्रदेश में दूसरे नंबर पर कौशांबी सुरक्षित सीट पर भी 15155 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।
श्रावस्ती सीट पर भी 14587 वोटरों ने नोटा का इस्तेमाल किया। बहराइच में 13498 व बासगांव में 13495 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया।
सीतापुर में 12682, खीरी में 12031 व बाराबंकी में 8726 मतदाताओं ने नोटा विकल्प को ही बेहतर समझा। धौरहारा में 8138 मतदाताओं ने नोटा में वोट दिया। कैसरगंज में भी 11853 मतदाताओं ने नोटा में वोट दिया है।
भाजपा से भी एक मुस्लिम सांसद नहीं
पिछले लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में 6 मुस्लिम सांसद चुने गए। लेकिन इस बार वोटों का धु्वीकरण ऐसा रहा कि प्रदेश से एक भी मुस्लिम संसद नहीं पहुंच पाया।
जबकि 16 सीटों पर वे मुस्लिम प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा 282 सीटें जीतने में कामयाब रही, लेकिन एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं जीत पाया।
यहां तक भाजपा के जानेमाने मुस्लिम पोस्टर ब्वॉय शाहनवाज हुसैन भी चुनाव हार गए।
हेमा को छोड़ यूपी में सभी सितारे हारे
उत्तर प्रदेश में हेमा मालिनी को छोड़ सभी सितारे चुनाव हार गए। कान्हा की नगरी मथुरा मतदाताओं पर हेमा का ऐसा जादू चला कि वह रालोद के मौजूदा सांसद जयंत चौधरी को तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराने में सफल हो गईं।
जबकि अभिनेत्री नगमा मेरठ से, राज बब्बर गाजियाबाद से, स्मृति ईरानी अमेठी से, रवि किशन जौनपुर से और जावेद जाफरी लखनऊ से चुनाव हार गए।
जया प्रदा का जलवा भी इस बार यूपी में नहीं दिखा और वे बिजनौर से हार गई।