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भारत में भी हो प्रमुख राजनेताओं में आमने सामने बहस
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 04 Oct 2012 05:11 PM IST
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पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने अमेरिका की तर्ज पर भारत में भी प्रमुख राजनेताओं की आमने सामने बहस होने की बात कही है। उन्होंने निराधार आरोपों व भाषणबाजी से बेहतर आमने सामने बहस को अधिक बेहतर कहा है। साथ ही जनता से ऐसी मांग करने की अपील की है। उन्होंने चुनाव आयोग और मीडिया को भी इस दिशा में पहल करने का सुझाव दिया।
जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने टि्विट किया है कि कल्पना कीजिये कि टीवी पर ओबामा और रोमनी की तरह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी के बीच बहस होती है। उन्होंने लिखा है कि एकतरफा भाषणबाजी से अच्छा है कि जनता यह मांग करे कि नेता आमने सामने बहस करें। एक दूसरे पर आधारहीन आरोप लगाने के बजाय उन्हें आमने सामने बात कहनी चाहिये।
साथ ही उन्होंने लिखा है कि हमें इस तरह के परिवर्तन की मांग करनी चाहिये। चुनाव आयोग को इस दिशा में भी पहल करनी चाहिये। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या उभरते लोकतंत्र को लेकर मुख्य बहस हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया इस तरह की मांग को पूरा कराने में मदद कर सकता है। ऐसी बहस मंच पर या स्टूडियो में हो सकती है।
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उन्होंने कहा कि मतदाता राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, मायावती, नरेंद मोदी, नीतीश कुमार और जयललिता जैसे नेताओं के बीच बहस की मांग कर सकते हैं। किरण बेदी ने इंडिया अंगेंस्ट करप्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की बहस के लिये इंडिया अगेंस्ट करप्शन या सिविल सोसायटी के पास भी प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास जैसे बेहतर उम्मीदवार हैं।
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जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने टि्विट किया है कि कल्पना कीजिये कि टीवी पर ओबामा और रोमनी की तरह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी के बीच बहस होती है। उन्होंने लिखा है कि एकतरफा भाषणबाजी से अच्छा है कि जनता यह मांग करे कि नेता आमने सामने बहस करें। एक दूसरे पर आधारहीन आरोप लगाने के बजाय उन्हें आमने सामने बात कहनी चाहिये।
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साथ ही उन्होंने लिखा है कि हमें इस तरह के परिवर्तन की मांग करनी चाहिये। चुनाव आयोग को इस दिशा में भी पहल करनी चाहिये। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या उभरते लोकतंत्र को लेकर मुख्य बहस हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया इस तरह की मांग को पूरा कराने में मदद कर सकता है। ऐसी बहस मंच पर या स्टूडियो में हो सकती है।
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उन्होंने कहा कि मतदाता राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, मायावती, नरेंद मोदी, नीतीश कुमार और जयललिता जैसे नेताओं के बीच बहस की मांग कर सकते हैं। किरण बेदी ने इंडिया अंगेंस्ट करप्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की बहस के लिये इंडिया अगेंस्ट करप्शन या सिविल सोसायटी के पास भी प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास जैसे बेहतर उम्मीदवार हैं।