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नेपाल सरकार के बाद मधेसी नेताओं का भी दिल्ली में डेरा

Mon, 07 Dec 2015 06:23 AM IST
Updated Mon, 07 Dec 2015 06:23 AM IST
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 External Affairs Minister, Sushma Swaraj  meets madhesi leadrs of nepal at hyderabad house in new delhi

नेपाल सरकार के बाद अब संविधान के कुछ प्रावधानों के खिलाफ आंदोलन कर रहे मधेसी नेताओं ने भी भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाने के लिए दिल्ली में डेरा डाल लिया है। इस क्रम में नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र महतो और संघीय समाजवादी नेपाली फोरम के मुखिया उपेंद्र यादव ने जदयू अध्यक्ष शरद यादव से मुलाकात कर समर्थन मांगा।

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अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर आंदोलन के लिए इन नेताओं की समर्थन जुटाने की योजना है। रविवार को मधेसियों के एक ग्रुप ने बाराखंबा स्थित नेपाली दूतावास के समक्ष प्रदर्शन भी किया। गौरतलब है कि इससे पहले संविधान पर समर्थन जुटाने केलिए नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा पहले ही दिल्ली में डेरा डाल चुके हैं।
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थापा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद विभिन्न दलों के नेताओं के साथ संविधान पर चर्चा कर चुके हैं। शरद यादव से मुलाकात के बाद महतो ने कहा कि नेपाल के संविधान में मधेसियों के लिए दोयम नागरिकता का प्रावधान करने के साथ-साथ कई अधिकारों में कटौती की गई है। दरअसल नेपाल की कम्युनिस्ट और माओवादी पार्टियां राजनीति में पहाड़ का दबदबा कायम करना चाहती हैं।
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आर्थिक नाकेबंदी का भारत से कोई लेना-देना नहीं

 External Affairs Minister, Sushma Swaraj  meets madhesi leadrs of nepal at hyderabad house in new delhi

मधेसी नेता महतो ने संविधान के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की और कहा कि आर्थिक नाकेबंदी का भारत से कोई लेना देना नहीं है। महतो ने कहा कि यह नेपाल का आंतरिक संकट है।

इसे संविधान में मधेशियों को बराबर का अधिकार दे कर तत्काल सुलझाया जा सकता है। उपेंद्र यादव ने बताया कि उनकी योजना अन्य दलों के नेताओं से बातचीत कर संविधान के प्रावधानों पर अपनी आपत्तियों की वजह बताने की है।

इस दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत और नेपाल का संबंध पहले की तरह गर्मजोशी भरा होगा। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि संविधान के कारण उपजे संकट का विवेकपूर्ण और उचित निदान निकाला जाए।

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