नेपाल सरकार के बाद मधेसी नेताओं का भी दिल्ली में डेरा
नेपाल सरकार के बाद अब संविधान के कुछ प्रावधानों के खिलाफ आंदोलन कर रहे मधेसी नेताओं ने भी भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाने के लिए दिल्ली में डेरा डाल लिया है। इस क्रम में नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र महतो और संघीय समाजवादी नेपाली फोरम के मुखिया उपेंद्र यादव ने जदयू अध्यक्ष शरद यादव से मुलाकात कर समर्थन मांगा।
अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर आंदोलन के लिए इन नेताओं की समर्थन जुटाने की योजना है। रविवार को मधेसियों के एक ग्रुप ने बाराखंबा स्थित नेपाली दूतावास के समक्ष प्रदर्शन भी किया। गौरतलब है कि इससे पहले संविधान पर समर्थन जुटाने केलिए नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा पहले ही दिल्ली में डेरा डाल चुके हैं।
थापा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद विभिन्न दलों के नेताओं के साथ संविधान पर चर्चा कर चुके हैं। शरद यादव से मुलाकात के बाद महतो ने कहा कि नेपाल के संविधान में मधेसियों के लिए दोयम नागरिकता का प्रावधान करने के साथ-साथ कई अधिकारों में कटौती की गई है। दरअसल नेपाल की कम्युनिस्ट और माओवादी पार्टियां राजनीति में पहाड़ का दबदबा कायम करना चाहती हैं।
आर्थिक नाकेबंदी का भारत से कोई लेना-देना नहीं
मधेसी नेता महतो ने संविधान के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की और कहा कि आर्थिक नाकेबंदी का भारत से कोई लेना देना नहीं है। महतो ने कहा कि यह नेपाल का आंतरिक संकट है।
इसे संविधान में मधेशियों को बराबर का अधिकार दे कर तत्काल सुलझाया जा सकता है। उपेंद्र यादव ने बताया कि उनकी योजना अन्य दलों के नेताओं से बातचीत कर संविधान के प्रावधानों पर अपनी आपत्तियों की वजह बताने की है।
इस दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत और नेपाल का संबंध पहले की तरह गर्मजोशी भरा होगा। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि संविधान के कारण उपजे संकट का विवेकपूर्ण और उचित निदान निकाला जाए।